Wednesday, September 2, 2026

कृषि नक्षत्र

 वर्षभर के 27 कृषि नक्षत्र और उनकी तिथियाँ 


1. अश्विनी 14 अप्रैल - 27 अप्रैल 

कृषि नववर्ष, खेतों की पहली जुताई।


2. भरणी 27 अप्रैल - 11 मई 

तीव्र गर्मी की शुरुआत, जमीन तपना।


3. कृत्तिका 11 मई - 25 मई 

नौतपा का प्रारंभ, धान के खेतों की तैयारी।


4. रोहिणी 25 मई - 08 जून 

मानसून पूर्व की हवाएं, आंधियां।


5. मृगशिरा 08 जून - 22 जून 

प्री-मानसून बौछारें, खरीफ की बुवाई।


6. आर्द्रा 22 जून - 06 जुलाई 

मानसून का मुख्य आगमन, भारी वर्षा।


7. पुनर्वसु 06 जुलाई - 20 जुलाई 

फसलों के लिए अमृत वर्षा, धान रोपाई।


8. पुष्य 20 जुलाई - 03 अगस्त 

लगातार रिमझिम वर्षा, खरपतवार नियंत्रण।


9. अश्लेषा 03 अगस्त - 17 अगस्त 

अत्यधिक वर्षा, कीटों का प्रकोप संभव।


10. मघा 17 अगस्त - 31 अगस्त 

मघा के बरसने से फसलों में भरपूर दाने बनते हैं।


11. पूर्वा फाल्गुनी 31 अगस्त - 13 सितंबर 

उमस और मध्यम वर्षा, फसलों का पकना शुरू।


12. उत्तरा फाल्गुनी 13 सितंबर - 27 सितंबर 

मानसून की विदाई का समय, बाजरा-मक्का कटाई।


.13 हस्त (हथिया) 27 सितंबर - 11 अक्टूबर 

रबी फसलों (गेहूं, चना) की नमी के लिए अंतिम वर्षा।


.14 चित्रा 11 अक्टूबर - 24 अक्टूबर 

मौसम साफ होना, रबी फसलों के खेतों की जुताई।


15. स्वाति 24 अक्टूबर - 06 नवंबर 

ओस पड़ना शुरू, सरसों और चने की बुवाई।


16. विशाखा 06 नवंबर - 19 नवंबर 

हल्की ठंड का आगमन, गेहूं की बुवाई का उत्तम समय।


.17 अनुराधा 19 नवंबर - 03 दिसंबर 

रबी फसलों में पहली सिंचाई।


.18 ज्येष्ठा 03 दिसंबर - 16 दिसंबर 

कड़ाके की ठंड की शुरुआत, पाला पड़ने का खतरा।


.19 मूल 16 दिसंबर - 29 दिसंबर 

सूखी और ठंडी हवाएं, आलू-सब्जियों की देखरेख।


.20 पूर्वाषाढ़ा 29 दिसंबर - 11 जनवरी 

कोहरा और शीत लहर, पाले से बचाव।


.21 उत्तराषाढ़ा 11 जनवरी - 24 जनवरी 

फसलों में कल्ले फूटना, यूरिया का छिड़काव।


.22 श्रवण 24 जनवरी - 06 फरवरी 

दलहन फसलों में फूल आना।


.23 धनिष्ठा 06 फरवरी - 19 फरवरी 

बसंत ऋतु का आगमन, सरसों में फलियां बनना।


.24 शतभिषा 19 फरवरी - 04 मार्च 

गन्ने और गर्मियों की सब्जियों की बुवाई।


.25 पूर्वा भाद्रपदा 04 मार्च - 17 मार्च 

तापमान बढ़ना, गेहूं की बालियां पकना।


.26 उत्तरा भाद्रपदा 17 मार्च - 31 मार्च 

गेहूं, सरसों और चने की कटाई (Harvesting)।


.27 रेवती 31 मार्च - 14 अप्रैल 

अनाज का भंडारण (Storage)

Tuesday, July 28, 2026

कॉकरोच आंदोलन और भारत

लोकतंत्र लोकलज्जा से या लोकविश्वास ही उसका आधार है । यदि लोकतंत्र में कभी भी लोकशाही में या मत से दिखने लगे कि जनमत साथ नहीं है या जन का विरोध है या जनविश्वास खो चुके हैं तो निसन्देह इस्तीफ़ा देना लोकतंत्र की गरिमा या लोकतंत्र का तक़ाज़ा है ।

इस बार के आंदोलन में कई बातें सीखने की है । नौजवान आज मीडिया न्यूज़ या प्रिंट न्यूज़ देखता नहीं है या यूँ कहें कि वह स्वयं न्यूज़ कंटेंट्स बनाता है । सबकी अपनी अपनी सोंच है पर राष्ट्र सर्वोपरि है और सभी ने अहिंसक आंदोलन चलाकर लोगों को दिखा दिया । उसमें भी सबसे बड़ी बात है कि सभी डिजिटल क्रिएटर हैं और उनकी अभिव्यक्ति हमलोगों से अधिक है । बहुत बड़ी बड़ी बात एक छोटे से शब्द या हावभाव से प्रदर्शित करना उनका बाँयें हाथ का खेल है । इनलोगों को स्पष्ट दिखता है कि देश में बुजुर्ग कुछ नहीं कर सकते । उन्हें आंदोलन करने में दिलचस्पी नहीं है बल्कि समस्याओं से जूझना उनकी नियति है ।


एक बात और है देश में पहली बार यह GEN G अपने आंदोलन में अपने करोड़ रुपया से अधिक कमानेवाले माँ पिता को भी आंदोलन में शिरकत करने के लिए मजबूर कर दिया । सबसे विचित्र महिलाओं नहीं बच्चियों की भागीदारी से हतप्रभ हूँ । लड़कियाँ अपनी सुरक्षा के लिए सहमी नहीं बल्कि आत्मनिर्भर होकर कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन में २४ घंटे योगदान दिया । आंदोलन में लड़के हों या लड़की कभी भी अपने घर में अपने माता पिता से डाँट तक नहीं सुनी मार खाने की बात तो सोंच भी नहीं सकते हैं । यही नहीं इन बच्चों को स्कूल में भी टीचर से कभी पिटायी नहीं हुई थी पर फिर भी पुलिस द्वारा लाठी , कैनन वाटर, घसीटने, आंसू गैस छोड़ने या पैलट गन के बाद भी अपना आपा नहीं खोया और नाहीं धैर्य में कमी आई । लोकतांत्रिक तरीके से अपना अहिंसक आंदोलन जारी रखा जबकि कुछ असामाजिक तत्व या सरकारी पुलिस द्वारा हिंसक प्रदर्शन किए जाने पर भी चट्टान की तरह अडिग रहा । सारे भांट मीडिया को नहीं बल्कि उनके मालिक को आनेवाले समय दुराग्रह से समाचार परोसने पर आनेवाली जेनरेशन न्यूज़ सिस्टम को ही धत्ता बना देगा यह सोंचा नहीं था पर मजबूर होकर मोदी जी भी दो बार अपनी अपील न्यूज़ में नहीं दी बल्कि इंस्टाग्राम पर जाकर दिया । मेरे बच्चे जेंन जी नहीं हैं पर प्रतिदिन फ़ोन पर कह रहे थे इंस्टाग्राम देखे पापा! एक छोटा सा कॉकरोच 🪳 जिससे महिलायें क्या पुरुष भी घृणा करता है आज आजाद भारत में बिना किसी नेता के सबसे कम दिनों में विरोध कर सबसे बड़ी जीत दर्ज कर ली । इस आंदोलन सबसे बड़ी ख़ासियत मजहब,धर्म, सम्प्रदाय, जातपात, उत्तर दक्षिण, पूरब पश्चिम सबको अपने में समेटे था और कोई विसंगति नहीं दिखी । इससे भी बड़ी बात यह थी कि विभिन्न राजनीतिक विचारधारा के छात्र अपने अपने ढंग से विरोध प्रदर्शित करते दिखे पर अपनी अहमियत की चादर दूर फेंक दिए !


शाबाश जेन जी! आनेवाला कल तुम्हारा ही है । यह तुम समझते ही नहीं हो पर लोकतंत्र और सत्य अहिंसा में विश्वास करते हो , यह देखकर विशाल भारत अपने पर नाज कर रहा होगा । भारत की अखंडता , संविधान, भाईचारा, लोकतंत्र को अक्षुण्ण होते देखकर मेरा दिल आहलाद्वित हो रहा है । 


जय युवा ! जय भारत ! जय संविधान! जय लोकतंत्र !

Monday, June 1, 2026

त्रिवेणी संघ

 *फारवर्ड प्रेस*


*त्रिवेणी संघ, जिसने डाली हिंदी पट्टी में सामाजिक न्याय की बुनियाद*


*बिहार में 1930 के दशक के साथ ही खासतौर से उत्पीड़ित जातियों के जागरण ने नए दौर में प्रवेश किया, जिसके केंद्र में पिछड़े थे। पिछड़ी जातियों के साझा पहचान व चेतना ने शक्ल अख्तियार करना शुरु किया। बता रहे हैं रिंकु यादव।*


*आधुनिक इतिहास में जब उत्पीड़न और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की बात कही जाती है तब बिहार के गौरवशाली इतिहास को भी शामिल किया जाता है। हालांकि सच यह भी है कि इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों में त्रिवेणी संघ के संघर्ष का अध्याय शामिल नहीं रहता है और इसके नायकों का नाम नायकों की सूची से गायब रहता है। यह अकारण अचेतन नहीं, बल्कि सचेतन है। एक समय त्रिवेणी संघ ने जीवन के हर क्षेत्र में कायम ऊंची जातियों के एकाधिकार को चुनौती दी थी। संघर्ष के इतिहास के उन अध्यायों से विभिन्न रंगों में रंगी प्रभुत्ववादी शक्तियां अब भी घबराती हैं। यहां तक कि प्रगतिशील-सेकुलर इतिहास बोध में आज भी उत्पीड़ित समूहों के संघर्ष और उसके नायकों को उचित जगह नहीं मिल पाई है।मसलन, हिंदी पट्टी के प्रमुख राज्यों में एक बिहार में सामाजिक न्याय की शक्तियां ताकतवर हैं, लेकिन त्रिवेणी संघ का संघर्ष व उसके नायकों को विस्मृति के अंधेरे से मुक्ति नहीं मिली है। यह निश्चित रूप से त्रासदपूर्ण और सामाजिक न्याय की जारी लड़ाई व राजनीति के संकट को रेखांकित करता है।*


*बहुतों को वर्तमान की चुनौतियों पर बात करने के बजाय इतिहास के इतने पीछे के अध्यायों से गुजरना महत्वहीन लग सकता है। लेकिन वर्तमान की चुनौतियां और आगे बढ़ने की जद्दोजहद में हम बार-बार इतिहास से भी गुजरते हैं। यह कोई अतीत मोह नहीं है, अपनी जड़ों को पकड़ने और उससे ताकत लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है ।*


*बिहार में 1930 के दशक के साथ ही खासतौर से उत्पीड़ित जातियों के जागरण ने नए दौर में प्रवेश किया, जिसके केंद्र में पिछड़े थे। पिछड़ी जातियों के साझा पहचान व चेतना ने शक्ल अख्तियार करना शुरु किया। उत्पीड़ित जातियों की एकता आगे बढ़ी। जाति से जमात बनने की प्रक्रिया आगे बढ़ी और अलग-अलग जाति संगठनों से साझा संगठन बनाने की ओर कदम बढ़ाया गया। त्रिवेणी संघ का गठन 30 मई, 1933 को उस समय के शाहाबाद जिले (वर्तमान में रोहतास जिला) के करगहर में हुआ। इसके संस्थापकों में चौधरी जे.एन.पी. मेहता, सरदार जगदेव सिंह यादव और डॉ. शिवपूजन सिंह प्रमुख थे। 1935 में प्रदेश स्तर पर त्रिवेणी संघ का गठन हुआ। गणपति मंडल सचिव और दासू सिंह अध्यक्ष बनाए गए। बाद में ऑल इंडिया त्रिवेणी संघ का गठन भी हुआ। उत्पीड़ित जातियों के साझा मंच के बतौर इसने बिहार में स्पष्ट दृष्टि व व्यापक एजेंडा के साथ सामाजिक न्याय की लड़ाई की बुनियाद रखी। पिछड़ों-दलितों के सामाजिक-राजनीतिक सशक्तिकरण का रास्ता खोला।*


*त्रिवेणी संघ का बिगुल*


*लेखक त्रिवेणी बंधु*


*30 मई, 1933 को सरदार जगदेव सिंह यादव, शिवपूजन सिंह और चौधरी जेएनपी मेहता ने किया था त्रिवेणी संघ का गठन*


*सवर्ण-अभिजात्य नेतृत्व में चल रही आजादी की लड़ाई की मुख्य धारा में अंग्रेजों से राज हासिल करने का सवाल था, लेकिन दलितों-पिछड़ों के लिए आजादी केवल अंग्रेजों के वापस अपने देश लौट जाने भर का सवाल नहीं था। उनके लिए सदियों से चली आ रही गुलामी से आजादी का सवाल भी महत्वपूर्ण था। बिहार की जमीन से त्रिवेणी संघ ने आजादी की लड़ाई में हाशिए के छोर से वैचारिक-राजनीतिक हस्तक्षेप किया।*


*जैसा कि आज भी जाति के प्रश्न और सामाजिक न्याय के सवालों पर ब्राह्मणवादी शक्तियों और सवर्ण वाम-प्रगतिशीलों की प्रतिक्रिया आती है, वैसे ही प्रतिक्रिया उस दौर में भी थी। कांग्रेस के लिए त्रिवेणी संघ सरकार और जमींदार प्रायोजित था तो किसान सभा की नजर में जातिवादी संगठन था। स्वामी सहजानंद और राहुल सांकृत्यायन आदि की धारणा भी त्रिवेणी संघ के बारे में ऐसी ही थी। कांग्रेस समर्थित अखबार भी त्रिवेणी संघ को जमींदारों द्वारा संचालित संगठन साबित करने की कोशिश में लगे थे। यहां तक कि 1937 में अंतरिम चुनाव के वक्त अपने दौरे में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी पटना और आरा की सभा में त्रिवेणी संघ की आलोचना की। उन्होंने (त्रिवेणी संघ का नाम न लेते हुए) राजनीतिक संप्रदायों के उभरने पर आश्चर्य व्यक्त किया। जात-पांत के विचार से अपनी असहमति जताते हुए उन्होंने हर किसी से राष्ट्रीय हित को आगे बढ़ाने के लिए काम करने की अपील की। (प्रसन्न कुमार चौधरी व श्रीकांत, बिहार में सामाजिक परिवर्तन के कुछ आयाम, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 2010, पृ. 122)*


 *त्रिवेणी संघ पर लगाए जा रहे आरोपों के उलट सच्चाई यह थी कि उस दौर के बिहार के सभी बड़े नेता अपनी-अपनी जाति के संगठनों में संलिप्त थे। स्वतंत्रता आंदोलन की अगुआई कर रही कांग्रेस पर सवर्णों का कब्जा था। संगठन के नेतृत्वकारी निकायों और चुनाव में उम्मीदवार के बतौर पिछड़े-दलितों के लिए दरवाजा बंद था। जबकि पिछड़े-दलित आजादी की लड़ाई में जमीन पर खून-पसीना बहा रहे थे, जेल व दमन झेल रहे थे। यहां तक कि किसान सभा पर भी भूमिहार-ब्राह्मण जाति के खुशहाल कायमी रैयतों का कब्जा था। लगान में जाति आधारित भेदभाव और तरह-तरह के अबवाब (जमींदार के द्वारा मालगुजारी के अतिरिक्त वसूला जानेवाला कर), जिसे त्रिवेणी संघ ने छिपा लगान की संज्ञा दी थी, किसान सभा के मुद्दों से गायब थे।*


*त्रिवेणी संघ को लेकर आज भी भ्रम फैलाया गया है कि यह तीन जातियों – यादव, कुशवाहा और कुर्मी – का संगठन था। हिंदी व्याकरण के आधार पर त्रिवेणी के ‘त्रि’ को तीन जातियों से जोड़ दिया जाता है। इस तरह का भ्रम उस दौर में भी फैलाया जाता था। उस दौर में त्रिवेणी संघ के नेताओं ने ऐसे भ्रमों का खंडन स्पष्ट रूप में किया था कि यह वास्तविक खेतिहर समुदायों, व्यवसायियों और मजदूरों का संगठन है। जरूर ही त्रिवेणी संघ के गठन के केंद्र में तीन प्रमुख पिछड़ी जातियों के लोग थे। लेकिन यह तमाम उत्पीड़ित जातियों के साझा मंच के बतौर ही आगे बढ़ा। संगठन की दृष्टि संकीर्ण नहीं थी और एजेंडा व्यापक था। 1940 ई. में यदुनंदन प्रसाद मेहता द्वारा लिखित ‘त्रिवेणी संघ का बिगुल’ तमाम दुष्प्रचार व आरोपों का जवाब देता है।*


*दरहकीकत, त्रिवेणी संघ ने धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक साम्राज्यवादियों के खिलाफ बिगुल फूंका था। सामाजिक न्याय की आंदोलन की नींव डालनेवाला यह संगठन धार्मिक धांधलियों, लूट, अन्याय, अत्याचार, अंधेरगर्दी और स्वार्थों का अंत सदा के लिए कर देना चाहता था। वह जन्म आधारित ऊंच-नीच के खिलाफ था और जाति के खात्मे का आकांक्षी था।*


*जरूर ही त्रिवेणी संघ बाहरी और भीतरी दोनों सरकारों के खिलाफ था। उसका मानना था कि भीतरी सरकार जमींदार, पूंजीपति और अपने को ऊंच तथा दूसरों को छोटे समझनेवाले अभिमानियों से बनी हुई है, जो गरीबों और वंचित समाज के लिए फिरंगी सरकार से भी खतरनाक है। ‘त्रिवेणी संघ का बिगुल’ में उल्लेखित है कि “त्रिवेणी संघ किसी भी सरकार को, जो बुरी हो, दूर करना चाहता है, बल्कि वह भीतरी सरकार की जड़ को भी उखाड़ देना चाहता है। यही भीतरी सरकार जमींदार, पूंजीपति और अपने को ऊंचा तथा दूसरों को छोटा समझने वाले अभिमानियों से बनी हुई है, जो गरीबों और अनुन्नत समाज के लिए विदेशी सरकार से भी अधिक खतरनाक है। जिसे हम कहते हैं राजनीतिक साम्राज्यवाद, जो पब्लिक वर्क्स से लेकर सरकारी महकमों तक या हेठ से ऊपर तक (नीचे से लेकर ऊपर तक) अपना आतंक फैलाए हुए है। गरीबों की वहां दाल नहीं गलती। यदि कोई भी अनुन्नत समाज का आदमी वहां पहुंच जाता है तो उन्हें छींक आने लगती है और कानाफूसी हो जाती है कि यह छोटी कौम का है – आने न पावे, ठहरने न पावे आदि-आदि।*


*ये बातें न केवल सरकारी नौकरियों तक ही रह गई है, बल्कि कांग्रेस-जैसी देशभक्त कहलाने वाली संस्था में भी आ गई है जैसा कि विगत चुनावों में देखा गया है।*


*(त्रिवेणी संघ का बिगुल, फारवर्ड प्रेस, नई दिल्ली द्वारा ऑनलाइन प्रकाशित आलेख से उद्धृत)*


*त्रिवेणी संघ ने आर्थिक साम्राज्यवाद के स्रष्टा के बतौर जमींदार, पूंजीपति तथा सरकार, चाहे वह देशी हो या विदेशी, को चिह्नित किया था। वह जमींदारों द्वारा खुला लगान के साथ छिपा लगान-बेगारी, नजराना के खिलाफ भी था। त्रिवेणी संघ किसानों के साथ न्याय, मजदूरों को मुनाफे के अनुसार मजदूरी, मजदूरों की सर्विस का ख्याल करने के साथ प्रोविडेंड फंड या पेंशन की व्यवस्था, वेतन की असमानता और बेकारी के सवाल पर भी बात करता था। त्रिवेणी संघ का साफ मानना था– जमीन अपने हाथ से हल चलानेवाले किसानों की है। त्रिवेणी संघ सेकुलर मूल्यों के साथ था, वह हिंदू-मुसलमान के बीच झगड़े के लिए पंडित और मौलवी को जिम्मेवार मानते हुए प्रेम-भाईचारे की बात करता था।*


*कुल मिलाकर त्रिवेणी संघ तमाम किस्म के अन्याय-गैरबराबरी के खिलाफ उत्पीड़ितों के आत्मसम्मान और नागरिक अधिकारों की दावेदारी करता है और राष्ट्र निर्माण की दृष्टि व सामाजिक-आर्थिक व राजनीतिक न्याय के व्यापक एजेंडा के साथ सामने आता है।*


*आज भी बढ़ते सवर्ण एकाधिकार और कॉरपोरेट कब्जा के हमलावर फासीवादी मुहिम के खिलाफ बिहार की जमीन से उभर रहे बहुजन आंदोलन के सामने यही चुनौती खड़ी है कि वह सामाजिक न्याय की राजनीति के सीमा-संकट से पार जाते हुए व्यापक एजेंडा पर बहुजनों की एकजुटता व स्वतंत्र दावेदारी को बुलंद करे। त्रिवेणी संघ के विरासत की यही मांग है।*


*(संपादन : राजन/नवल/अनिल)*


*फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें।*

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Tuesday, May 5, 2026

महिला और मनुस्मृति

 हिंदुओं के संविधान "मनुस्मृति" नामक धर्मग्रंथ में स्त्रियों के लिए क्या लिखा है, उसके कुछ अंश -


पुरुषों को दूषित करना स्त्रियों का हिंदुओं के संविधान "मनुस्मृति" नामक धर्मग्रंथ में स्त्रियों के लिए क्या लिखा है, उसके कुछ अंश -


पुरुषों को दूषित करना स्त्रियों का स्वभाव है, इसलिए विवेकी पुरुष युवती स्त्रियों के विषय में कभी प्रमाद नहीं करते।


- मनुस्मृति, 2-213


चाहे मूर्ख हो या विद्वान उनकी युवती स्त्री कुमार्ग में ले जाने में समर्थ होती है।


- मनुस्मृति, 2-214


जिस यज्ञ में स्त्री या नपुंसक ने हवन किया हो उस यज्ञ में ब्राह्मण कदापि भोजन न करें।


- मनुस्मृति, 4-205


बालिका हो या युवती या वृद्धा स्त्री को स्वतंत्रता पूर्वक घर का कोई काम नहीं करना चाहिए।


- मनुस्मृति, 5-147


स्त्री बाल्यकाल में पिता के, यौवनावस्था में पति के और पति का परलोक होने पर पुत्रों के अधीन होकर रहे। कभी स्वतंत्र होकर न रहे।


- मनुस्मृति, 5-148


पिता, पति या पुत्र से पृथक रहने की इच्छा न करे। इनसे अलग रहने वाली स्त्री दोनों कुलों (पति-पितृ) को निन्दित करती है।


- मनुस्मृति, 5-149


यदि पति अनाचारी हो या परस्त्री में अनुरक्त हो, या विद्यादि, गुणों से रहित हो, तो भी साध्वी स्त्री को सर्वदा देवता की तरह अपने पति की सेवा करनी चाहिए।


- मनुस्मृति, 5-154


स्त्रियों के लिए न यज्ञ है, न व्रत है और न उपवास है। पति की सेवा से ही वह स्वर्गलोक में पूजित होती है।


- मनुस्मृति, 5-155


पति के मरने पर स्त्री फल-फूल और मूल खाकर देह क्षीण करे, परन्तु पर पुरुष का कभी नाम न ले।


- मनुस्मृति, 5-157


पत्नी, पुत्र और सेवक, ये तीनों निर्धन कहे गए हैं क्योंकि इनका उपार्जन किया धन उस उसका होगा, जिसके ये पुत्र, कलत्र और सेवक हैं।


- मनुस्मृति, 8-416


पुरुषों को कभी अपने स्त्रियों को स्वतंत्रता न देनी चाहिए। स्त्रियाँ यदि रूप-रसादि में आसक्त हों तो भी उन्हें अपने वश में रखना चाहिए।


- मनुस्मृति, 9-2


स्त्रियों की बाल्यावस्था में पिता, युवावस्था में पति और बुढ़ापे में पुत्र रक्षा करता है, स्त्री कभी स्वतंत्रता योग्य नहीं है।


- मनुस्मृति, 9-3


मदिरा पीना, दुष्टों की संगति, पति का वियोग, इधर-उधर घूमना, अकाल में सूतना और दूसरे के घर में रहना ये छ: दोष स्त्रियों के दोष हैं।


- मनुस्मृति, 9-13


स्त्रियाँ रूप की प्रतिक्षा नहीं करती हैं, न तो अवस्था का ध्यान रखती हैं, सुन्दर हो या कुरूप हो पुरुष होने ही से वे उसके साथ संभोग करती हैं।


- मनुस्मृति, 9-14


पुंश्चल (पराये पुरुष से भोग की इच्छा) दोष से, चंचलता से और स्वभाव से ही स्नेह न होने के कारण घर में यत्नपूर्वक रखने पर भी स्त्रियाँ पति के विरुद्ध काम करती हैं।


- मनुस्मृति, 9-15


मनुजी ने सृष्टयादि में शय्या, आसन, आभूषण, काम, क्रोध, कुटिलता, द्रोह और दुराचार स्त्रियों के लिए ही कल्पना की थी।


- मनुस्मृति, 9-17


धर्मशास्त्र के व्यवस्था के अनुसार स्त्रियों की जातकर्मादि क्रियाएँ मंत्रों से नहीं करनी चाहिए, उन्हें मंत्रों का ज्ञान और अधिकार भी नहीं है, उनकी झूठ ही में स्थिति है।


- मनुस्मृति, 9-18


बेचने से या त्याग देने से स्त्री पति के पत्नीत्व से अलग नहीं होती है।


- मनुस्मृति, 9-46


जो स्त्री स्वामी के दूसरा ब्याह करने पर रुष्ट होकर घर से भागे तो उसे पकड़कर घर में बंद कर देना चाहिए या उसको उसके बाप के घर पहुँचा देना चाहिए।


- मनुस्मृति, 9-83


कन्या, युवा स्त्री, थोड़े पढ़े-लिखे, मूर्ख, पीड़ित और जिनका यज्ञोपवीतादि नहीं हुआ है वे अग्निहोत्र के हवनीय कार्य को न करें।


- मनुस्मृति, 11-36 है, इसलिए विवेकी पुरुष युवती स्त्रियों के विषय में कभी प्रमाद नहीं करते।


- मनुस्मृति, 2-213


चाहे मूर्ख हो या विद्वान उनकी युवती स्त्री कुमार्ग में ले जाने में समर्थ होती है।


- मनुस्मृति, 2-214


जिस यज्ञ में स्त्री या नपुंसक ने हवन किया हो उस यज्ञ में ब्राह्मण कदापि भोजन न करें।


- मनुस्मृति, 4-205


बालिका हो या युवती या वृद्धा स्त्री को स्वतंत्रता पूर्वक घर का कोई काम नहीं करना चाहिए।


- मनुस्मृति, 5-147


स्त्री बाल्यकाल में पिता के, यौवनावस्था में पति के और पति का परलोक होने पर पुत्रों के अधीन होकर रहे। कभी स्वतंत्र होकर न रहे।


- मनुस्मृति, 5-148


पिता, पति या पुत्र से पृथक रहने की इच्छा न करे। इनसे अलग रहने वाली स्त्री दोनों कुलों (पति-पितृ) को निन्दित करती है।


- मनुस्मृति, 5-149


यदि पति अनाचारी हो या परस्त्री में अनुरक्त हो, या विद्यादि, गुणों से रहित हो, तो भी साध्वी स्त्री को सर्वदा देवता की तरह अपने पति की सेवा करनी चाहिए।


- मनुस्मृति, 5-154


स्त्रियों के लिए न यज्ञ है, न व्रत है और न उपवास है। पति की सेवा से ही वह स्वर्गलोक में पूजित होती है।


- मनुस्मृति, 5-155


पति के मरने पर स्त्री फल-फूल और मूल खाकर देह क्षीण करे, परन्तु पर पुरुष का कभी नाम न ले।


- मनुस्मृति, 5-157


पत्नी, पुत्र और सेवक, ये तीनों निर्धन कहे गए हैं क्योंकि इनका उपार्जन किया धन उस उसका होगा, जिसके ये पुत्र, कलत्र और सेवक हैं।


- मनुस्मृति, 8-416


पुरुषों को कभी अपने स्त्रियों को स्वतंत्रता न देनी चाहिए। स्त्रियाँ यदि रूप-रसादि में आसक्त हों तो भी उन्हें अपने वश में रखना चाहिए।


- मनुस्मृति, 9-2


स्त्रियों की बाल्यावस्था में पिता, युवावस्था में पति और बुढ़ापे में पुत्र रक्षा करता है, स्त्री कभी स्वतंत्रता योग्य नहीं है।


- मनुस्मृति, 9-3


मदिरा पीना, दुष्टों की संगति, पति का वियोग, इधर-उधर घूमना, अकाल में सूतना और दूसरे के घर में रहना ये छ: दोष स्त्रियों के दोष हैं।


- मनुस्मृति, 9-13


स्त्रियाँ रूप की प्रतिक्षा नहीं करती हैं, न तो अवस्था का ध्यान रखती हैं, सुन्दर हो या कुरूप हो पुरुष होने ही से वे उसके साथ संभोग करती हैं।


- मनुस्मृति, 9-14


पुंश्चल (पराये पुरुष से भोग की इच्छा) दोष से, चंचलता से और स्वभाव से ही स्नेह न होने के कारण घर में यत्नपूर्वक रखने पर भी स्त्रियाँ पति के विरुद्ध काम करती हैं।


- मनुस्मृति, 9-15


मनुजी ने सृष्टयादि में शय्या, आसन, आभूषण, काम, क्रोध, कुटिलता, द्रोह और दुराचार स्त्रियों के लिए ही कल्पना की थी।


- मनुस्मृति, 9-17


धर्मशास्त्र के व्यवस्था के अनुसार स्त्रियों की जातकर्मादि क्रियाएँ मंत्रों से नहीं करनी चाहिए, उन्हें मंत्रों का ज्ञान और अधिकार भी नहीं है, उनकी झूठ ही में स्थिति है।


- मनुस्मृति, 9-18


बेचने से या त्याग देने से स्त्री पति के पत्नीत्व से अलग नहीं होती है।


- मनुस्मृति, 9-46


जो स्त्री स्वामी के दूसरा ब्याह करने पर रुष्ट होकर घर से भागे तो उसे पकड़कर घर में बंद कर देना चाहिए या उसको उसके बाप के घर पहुँचा देना चाहिए।


- मनुस्मृति, 9-83


कन्या, युवा स्त्री, थोड़े पढ़े-लिखे, मूर्ख, पीड़ित और जिनका यज्ञोपवीतादि नहीं हुआ है वे अग्निहोत्र के हवनीय कार्य को न करें।


- मनुस्मृति, 11-36

Monday, May 4, 2026

दोस्त का अवसान

 *आज रात्रि में धनंजय भाई के अंतिम संस्कार बारहवीं में शामिल होने के क्रम में रहीम भाई के साथ दिवंगत धनंजय की सुपुत्री, दामाद, सास, अग्रज भ्राता, साला, साली, साढ़ू से मिला और ब्रह्मभोज के बाद जब भाभी से मिला तब वेदना और दुख के सभी भाव अनायास कौंधने लगा । माँ अर्थात अबधेश बाबू  अरे यार मुकरी चाचा की पत्नी के सामने विधवा बेटी । वह भी ८५ वर्ष की चहल क़दमी कम से कम रहीम भाई से अच्छा से चल रही थी …*


*सोंचिए माहौल कैसा गमगीन होगा ।शोक पीड़ित भाभी जी के आँखों से आँसू छलक कर पूरा माहौल गमगीन और भावुक होने लगा । हमदोनों तो निःशब्द थे ही । शांत माहौल में किसीने हमलोगों का जब नाम लिया तब उनकी पलकें नीचे फर्श की तरफ झुकी रह कर आँसू झरने की तरह और सिसकियाँ देखकर मुझमें बैठने की हिम्मत न थी । मिनटों में चुपचाप हमदोनों निकल गए, शायद सब्र का बांध टूटने के बाद जल्दी रुके । वेबकूफी कर गया कि भाभी जी से मिलने चला गया ! अफ़सोस उनसे नहीं मिलता तब कम से कम मैं भी उतना संजीदा न होता ।*


*जीवन में मरना ही सत्य है यह जानते हुए गुमशुम निकलकर आसमान निहारता रहीम भाई को गाड़ी में बैठाकर निकल गया । गाड़ी चलाते सभी बिछड़े दोस्तों के मन ही मन नाम लेकर उसकी यादों के साथ पों पाँ करते निकल गया ।*


*जनार्दन, अमलेन्द्र, राम सागर, संजीवन, मृगेंद्र, चाणक्य, सर्वानन्द आदि का चेहरा घूमने लगा तभी रहीम भाई सिगरेट पिओगे की आवाज आई और हाँ में मुंडी हिलाकर गाड़ी साईड कर सिगरेट की तलाश में मैं निकल आया । गली में २०० फीट दो तीन दुकान में पूछने पर जब सिगरेट नहीं मिला तब आसमान से बूँदा बूँदी होते देख लौट कर फिर गाड़ी चलाने लगा और कॉलेजियट स्कूल के गेट के आगे रहीम भाई को ड्राप करने के समय दोनों सिगरेट सुलगायी । अंतिम पफ तक पिया शायद गम को भी जला दूँ ।*


*कमबख़्त गम को जितना भूलना चाहो मन मश्तिष्क में और आता है । फिर ३.३० बजे भोर में नींद उचट गई और मोबाइल रूपी सेलेट पिन्सुल लेकर तुम दोस्तों को भी झकझोर दिया । भोर ४.४५ हो गया, कौआ की एक काव मैंने सुनी ।गुरुदत्त और मोहम्मद रफ़ी .. काग़ज़ के फूल का एक गाने के साथ विराम देता हूँ …*


*अरे देखी ज़माने की यारी*

*बिछड़े सभी, बिछड़े सभी बारी बारी*


*क्या ले के मिलें अब दुनिया से,* *आँसू के सिवा कुछ पास नहीं*

*या फूल ही फूल थे दामन में,* *या काँटों की भी आस नहीं*

*मतलब की दुनिया है सारी*

*बिछड़े सभी, बिछड़े सभी बारी बारी*


*वक़्त है महरबां, आरज़ू है जवां*

*फ़िक्र कल की करें, इतनी फ़ुर्सत कहाँ*


*दौर ये चलता रहे रंग उछलता रहे*

*रूप मचलता रहे, जाम बदलता रहे*


*रात भर महमाँ हैं बहारें यहाँ*

*रात गर ढल गयी फिर ये खुशियाँ कहाँ*

*पल भर की खुशियाँ हैं सारी*

*बढ़ने लगी बेक़रारी बढ़ने लगी बेक़रारी*

*अरे देखी ज़माने की यारी*

*बिछड़े सभी, बिछड़े सभी बारी बारी*


*उड़ जा उड़ जा प्यासे भँवरे, रस ना मिलेगा ख़ारों में*

*कागज़ के फूल जहाँ खिलते हैं, बैठ ना उन गुलज़ारो में*

*नादान तमन्ना रेती में, उम्मीद की कश्ती खेती है*

*इक हाथ से देती है दुनिया, सौ हाथों से लेती है*

*ये खेल है कब से जारी*

*बिछड़े सभी, बिछड़े सभी बारी बारी*


https://youtu.be/s3LFjzxFKbw?si=gDEGN3CSBX6mip1L

Sunday, April 19, 2026

पटना बंदरगाह/ स्टीमर सेवा

Sunday musing....


*बच्चा बाबू के स्टीमर* : 👇




*महात्मा गांधी सेतु* के निर्माण के पहले *उत्तर बिहार को राजधानी पटना* से जोड़ने का एकमात्र मार्ग था *जलमार्ग* और इस पर चला करते थे *सोनपुर के रईस बच्चा बाबू के स्टीमर* पहले पहलेजा तक लोग बस और ट्रेन से आया करते थे और *पहलेजा से एलसीटी घाट महेंद्रु घाट और बांस घाट के बीच स्ट्रीमर* चला करते थे इनकी तयशुदा सीमा होती थी और इसके लिए टिकट लेकर लोगों को घंटों इंतजार करना होता था।

*रेलवे स्टीमर* के अलावा *पटना और पहलेजा घाट* के बीच लोगों के लिए *दो और स्टीमर सेवा* चलती थी। *बाँस घाट से बच्चा बाबू की स्टीमर सेवा* भी काफी लोकप्रिय थी। 

*बच्चा बाबू सोनपुर के रईस* थे, जिनकी *निजी कंपनी बाँस घाट से पहलेजा घाट के बीच स्टीमर सेवा* का संचालन करती थी।बड़ी संख्या में लोग इस सेवा से भी आते जाते थे। 


जब लोग राजधानी पटना से सफर करके अपने गाँव पहुँचते तो हालचाल के साथ ये भी पूछते कौन से जहाज से आये तो लोग जवाब देते बच्चा बाबू के जहाज से।


जहाज के इस सफर में इंतजार और सफर में काफी वक्त जाया हो जाता था। इसलिए *पढ़ाकू विद्यार्थी* अपनी किताबें खोल कर जहाज में पढ़ने बैठ जाते थे। समय का सदुपयोग करने के लिए। 


वहीं *पटना के कुर्जी* के पास मैनपुरा से लगी थी *गंगा एलसीटी सर्विस की सेवा*। एलसीटी मतलब *लैंडिग क्राफ्ट टैंक*। 


ऐसी फेरी का इस्तेमाल माल ढुलाई के लिए किया जाता था। तो *गंगा एलसीटी सर्विस पटना और पहलेजा के बीच माल ढुलाई* का महत्वपूर्ण साधन थी। 

इसके *आधार तल पर माल लोड किया जाता था वहीं ऊपरी तल पर लोग सफर* करते थे। *आधार तल पर दो ट्रक, कुछ जीपें, ढेर सारा खाने-पीने का सामान, मोटरसाइकिलें* आदि बुक करके लादी जाती थीं। 


वहीं *एलसीटी सेवा से सोनपुर मेले के समय बड़ी संख्या में हाथी घोड़े और दूसरे जानवर* भी लाद कर इस पार से उस पार लाये जाते थे। 


*गंगा एलसीटी सेवा* एक समय में *पटना में गंगा नदी पर एक बंदरगाह* की तरह हुआ करता था। अब ये सेवा बंद हो चुकी है। पर *पटना के मैनपुरा में एलसीटी घाट* नाम से इलाके का नाम अब भी मशहूर है। जहाज नहीं है, बंदरगाह नहीं पर नाम में उसकी *स्मृतियाँ कायम* है।  


*एलसीटी* के लिए पटना में इस्तेमाल में लाये जाने वाले *जहाज मूल ब्रिटिश रॉयल नेवी* की ओर से विकसित किये गये थे। *दूसरे विश्वयुद्ध* के दौरान इनका कई जगह इस्तेमाल हुआ। 


पहले इनका नाम *टैंक लैंडिग क्राफ्ट* हुआ करता था। बाद में *अमेरिकी नामकरण प्रणाली के मुताबिक इनका नाम एलसीटी (लैंडिंग क्राफ्ट वेसल)* हो गया।


कोई भी जहाज जब अपने मंजिल तक पहुँचने वाला होता था। चाहे पहलेजा की तरफ हो या फिर पटना तरफ। जहाज किनारे लगने से पहले ही बड़ी संख्या में कुली पानी में कूद-कूद कर तेजी से चारों तरफ से जहाज में घुस आते थे। मानो वे जहाज पर हमला करने आये हों। उसके बाद वे अपने ग्राहकों की तलाश में जुट जाते किसे कुली चाहिए। जो हाँ कहता उसके सामान पर कब्जा कर लेते। 


उस जमाने में उत्तर बिहार के लोग बहुत आयत जूट के मील जिसे स्थानीय भाषा में चटकल कहा जाता था में मौसमी नौकरी करने पश्चिम बंगाल जाते थे, तब के जमाने में पश्चिम बंगाल में चटकल मिलों में आसानी से लोगों को काम मिल जाता था। 


भोजपुरिया गीत-संगीत और स्मृतियों में आज भी बंगाल, इसी कारण से लोगों के जेहन में कायम है *भिखारी ठाकुर से लेकर महेंद्र मिश्र* तक लोक गायकों ने बंगाल के इन्हीं कामासूतो को देख कर के अपने गीत *गवनई को जीवंत* किया। बीड़ी पीना, लूंगी पहनना और चाय का आध बंगाल से ही बिहार आया। 


सोनपुर और पटना के बीच में चलने वाले जहाज में भी उस जमाने में टिकट के रेट के हिसाब से व्यवस्था होती थी *वन क्लास और सामान्य क्लास* गाड़ियों को लगने से लेकर समान तक की ढुलाई होती थी। 


एक और साधन था वह *गांधी घाट और रानी घाट के बीच बडहरवा घाट से सोनपुर मेले* के 1 महीने पहले से *बच्चा बाबू का जहाज पटना से गंगा पार कर दियारा* तक ले जाया जाता था। जिसका सदुपयोग कर *सोनपुर मेला जाने वाले यात्री और जानवरों की खरीद और बिक्री के लिए ले जाए जाते थे*।

सेवानिवृत्ति आलेख्य

 ई० नलिन कुमार सिन्हा

तकनीकी प्रवैधिक, अभियंता प्रमुख, ग्रामीण कार्य विभाग 

की सेवा निवृत्ति के शुभ अवसर पर उनके कर-कमलों के अभिनव कुसुम पराग सस्नेह समर्पित


अभिनन्दन-पत्र

मगध साम्राज्य की राजधानी पाटलीपुत्र की पावन धरती के तकनीकी सचिवालय, विश्वेश्वरैया भवन अवस्थित ग्रामीण कार्य बिभाग, पटना से दिनांक 31 जनवरी 2023, मंगलवार के अपराह्न तक 35 वर्ष 7 माह की सेवा करने के पश्चात, सरलचित्त, उदारचरित अपने पद पर आसीन रहते हुए सफलतापूर्वक सेवानिवृत्त हो रहे हैं, यह हमलोगों के लिए गौरवान्वित एवम भावुक क्षण है ।

हमें अपार हर्ष है क्योंकि एक कर्मठ अभियंता के रुप में बिभाग के तकनीकी कार्यों का सम्पादन किये हैं और दूसरी तरफ विषाद इसलिए कि अभिन्न एवम कर्तव्यनिष्ठ अभियंता जिसमें प्रबंधन, प्रशासनिक दूरदर्शिता के साथ साथ मित्रवत व्यबहार रहा है, हमसे दूर जा रहे हैं ।

ग्राम- कल्याण बीघा, नालन्दा निवासी श्री सिन्हा का जन्म 3-01-1963 को पटना जिला में हुआ । मैट्रिक में विशेष स्थान के बाद प्रख्यात सायन्स कॉलेज, पटना से इंटर पास कर BCE पटना (सम्प्रति NIT पटना) से 1986 में B. Sc. Civil Engineering की प्रथम श्रेणी में स्नातक डिग्री के पश्चात BIT सिन्दरी के CIVIL विभाग में अंशकालिक व्याख्याता के पद पर कार्य करने के पश्चात 22 जून 1987 को बिहार अभियंत्रण सेवा अंतर्गत जल संसाधन बिभाग, बिहार सरकार में सहायक अभियंता के पद पर योगदान दिया । जलसंसाधन विभाग अंतर्गत अग्रिम योजना मोकामा टाल परियोजना, गुमानी बराज, बरहेट, साहेबगंज, रुपांकण प्रमंडल, देवघर (झारखंड), सोन नहर आधुनिकीकरण योजना, पूर्वी गंडक नहर का आधुनिकीकरण का सूत्रण, अनुश्रवण, मूल्यांकण से लेकर पालिसी फ्रेमिंग के कार्यों के सम्पादन के बाद 22 जुलाई 2008 से 30 जून 2013 तक ग्रामीण कार्य विभाग में पथों , पुलों का निर्माण एवम मुख्यालय स्तर पर क्षमता संवर्द्धन कार्य  करने के बाद कार्यपालक अभियंता के रुप में कार्य प्रमंडल कटिहार अंतर्गत निर्माण एवम अनुरक्षण के दायित्वों का दक्षतातापूर्वक निर्वहन किया है । 22 जून 2016 से मुख्यालय स्तर पर नाबार्ड नोडल एवम राज्यस्तरीय महत्वाकांक्षी MMGSY परियोजना के नोडल के पद पर आसीन रहकर राज्य के सभी कोरनेटवर्क योजनाओं की स्वीकृति एवम कार्यो का कुशल अनुश्रवण किया है । आपने वाह्य ऋण सम्पोषित विश्व बैंक और NDB योजनाओं के परियोजना निदेशक के रुप में भारत सरकार और ऋण संस्थानों के साथ सफल अनुश्रवण का कार्य किया है । वर्ष 2019 से अधीक्षण अभियंता के रुप में गुणवत्ता प्रबन्धन कोषांग एवं अभियंता प्रमुख के प्रावैधिक सचिव के साथ साथ पूर्ववत MMGSY कोषांग के कार्यो के दायित्वों का दक्षता एवम कुशलता के साथ 31 जनवरी 23 तक सम्पादित किया है । सेवा काल में आपने बर्मिंघम विश्वविद्यालय, इंग्लैंड में साप्ताहिक, वाल्मी में त्रैमासिक  IIM लुखनऊ में पाक्षिक, IIM अहमदाबाद, CSIR ओखला, IHAE नोएडा में पाक्षिक एवम अन्य प्रतिष्ठानों में विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण प्राप्त किया है । आपकी दक्षता, प्रशासनिक क्षमता एवम MMGSY में पथों एवम पुलों के निर्माण में योगदान के कारण 27-05-2018 को राज्यस्तरीय कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री, बिहार सरकार, आदरणीय नीतीश कुमार द्वारा पुरस्कार प्रदान किया गया है । 

इस लंबे सेवाकाल में विभन्न विभागों के भिन्न भिन्न स्तर के पदों पर आसीन रहकर आपने उत्तरदायित्वपूर्ण एवम कुशलता से कार्यो का निष्पादन किया है जिसमें MMGSY का कार्यकाल सदैव स्वर्णिम काल के रुप में याद किया जाएगा । अधिकारियों एवम कर्मचारियों के मध्य आप एक कड़क पदाधिकारी एवम विभाग की समस्याओं के त्वरित निवारण में अग्रणी भूमिका अदा की है । आप आस-पास रहकर तो सदैव मार्ग दर्शन करते रहे हीं हैं , आशा एवम पूर्ण आस्था है कि आप दूर रहकर भी हमारे रहेगें ।

विदाई की इस कठिन वेला में हम आपके क्रियमान शक्तियों का गुणानुवाद करने में असमर्थ हो रहे हैं । अतः यदि किसी मोड़ पर हम पदाधिकारी- कर्मचारी से किसी प्रकार की भूल हुई हो जिससे आप आहत हुए हों तो इसके लिए हम सभी क्षमा प्रार्थी हैं ।

पदाधिकारीगण एवम कर्मचारीगण की हार्दिक कामना है कि आप जहाँ भी, जिस क्षेत्र या परिवेश में पदार्पण करे -वह फलदायी हो- मंगलकारी हो ।

हम हैं:-

आपके स्नेहाभिशिक्त पदाधिकारी एवम कर्मचारीगण ग्रामीण कार्य बिभाग, बिहार पटना ।

Wednesday, May 28, 2025

चार धाम

चारधाम यात्रा वृत्तांत


मैं और मेरे बहनोई सपत्नीक दोनों देहरादून अपने बड़े साढू डीआरडीओ से सेवानिवृत  के साथ १८ मई को प्रातः ८ बजे मसूरी के रास्ते कैंप्टी फ़ाल होते बाराकोट के समीप कैम्प नंदगांव के yaantra रिसोर्ट में पहुँचे (कुल दूरी - २०० कि मी)। रास्ते में पांडवों के लाखा गृह के दर्शन भी श्रद्धालु करते हैं ।प्रातः स्नान के पश्चात ४ बजे हनुमानचट्टी, जानकी चट्टी होते हुए १९ मई को ७ किलोमीटर संकरे पहाड़ों के मार्ग से होकर गर्म कुंड (सूर्य कुंड), दिव्य शिला पूजन के बाद सूर्य पुत्री यमराज और शनि देव की बहन यमुना जी के उद्गम स्थल यमुनोत्री का दर्शन के पश्चात पुनः शाम ६ बजे तक निर्वाणा रिसोर्ट पहुँचे । गर्म कुंड का प्रसाद कच्चा चावल को पोटली में डालकर भात की मान्यता है ।यमुनोत्री चढ़ाई कष्टकर है जिसका तापमान दिन में भी ४डिग्री था पर जानकी चट्टी का तापमान १८ डिग्री सेल्सियस था । चढ़ाई के लिए श्रद्धालु पिट्ठू, घोड़ा, डोली या पैदल एकमात्र उपाय है ।

२० मई को उत्तरकाशी में प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर दर्शन (दूरी-१२५KM) के पश्चात भागीरथी नदी के तट पर आरती स्थल के समीप साक्षी रिसोर्ट में विश्राम किया । यह स्थल नौका विहार के लिए भी प्रसिद्ध है । २१ मई प्रातः ५ बजे नित्य कर्म से निवृत होकर हरसिल के रास्ते हिमालय के खूबसूरत घाटियों से होकर गनगनी hot spring वाटर स्नान के पश्चात गंगोत्री में भागीरथ के आह्वान स्थल पर गंगोत्री में स्नान दर्शन पूजा के पश्चात शाम ७ बजे  भागीरथी नदी के तट पर साक्षी में विश्राम किया ।(दूरी-up _ down २००KM)

२२ मई २००KM भ्रमण उत्तरकाशी से प्रारंभ कर बूढ़ा केदार, रुद्र प्रयाग के रास्ते गुप्त काशी के कैम्प निर्वाणा रिसोर्ट में रात्रि विश्राम किया । यहाँ पंच केदार की मान्यता है , जिसमें बूढ़ा केदार में पशु के वेश में रहने के कारण पांडवों ने पहचान नहीं कर पाया । गुप्त काशी से सोन प्रयाग और गौरी कुंड स्नान के पश्चात १६ किलोमीटर के ट्रेक पर केदारनाथ जी मंदाकिनी नदी के उद्गम स्थल पर है ।

23 May मैंने प्रातः काली मठ में देवी दर्शन के पश्चात केदार नाथ के लिए प्रस्थान किया ।मैंने फाँटा से हेलीकॉप्टर [जो बरसात या मौसम के अनुसार स्थगित भी हो जाता है ।] से केदार पहुँच कर केदारनाथ जी, भैरव, भीम शिला, शंकराचार्य समाधि स्थल का दर्शन रात्रि में २4 मई को प्रातः २ बजे विशेष पूजा अर्चना कर (रात भर बारिश के कारण अधिक ठंढ की अनुभूति -१degree एक डोरमेटरी होटल में ठहरा था ) ४ घंटे की प्रतीक्षा के पश्चात २४ मई को हेलीकॉप्टर से फाँटा के रास्ते गुप्त काशी के रिसोर्ट लौटकर रात्रि विश्राम किया । केदारनाथ जी के स्थल का विवरण पंक्ति में लिपिबद्ध करना संभव नहीं है ।

२५ मई को गुप्तकाशी में अर्द्धनारेश्वर मन्दिर दर्शन और शारदीय केदारनाथ जी के ऊखीमठ स्थल में पूजा अर्चना के पश्चात चोपता वैली (Mini Switzerland)के अति प्राकृतिक मनोहारी दृश्य के पश्चात हिरण्यकश्यपु मंदिर के दर्शन के पश्चात जोशीमठ के रास्ते बद्रीनाथ के Amrita the Awadh में रात्रि विश्राम किया ।

२६ मई प्रातः ३ बजे स्नान कर बद्री नाथ जी के प्रातः आरती और गर्म कुंड के मार्ग से बद्रीनाथ जी का दर्शन पूजन हवन कर होटल में ६ बजे पहुँचा । बद्री नाथ अलकनंदा नदी पर अवस्थित है । भारत चीन बॉर्डर पर अंतिम गांव माना सरस्वती और अलकनंदा के संगम पर अवस्थित है । माना ग्राम में चाय का भारत में सबसे प्रथमबार उपयोग में लाया गया था । २KM ट्रेक पर गणेश मंदिर, व्यास गुफा दर्शन, भीम पुल, सरस्वती नदी का उद्गम स्थल, स्वर्ग द्वार जिससे पांडवों में हिमालय शृंखला से भैरव की पूंछ आसरे स्वर्ग प्रस्थान स्थल का भ्रमणोप्रांत Auli वैली होकर जोशीमठ - विष्णु प्रयाग के रास्ते कर्ण प्रयाग नंद प्रयाग होते हुए रुद्र प्रयाग मोनल रिसोर्ट में रात्रि ९ बजे पहुँचा ।Aulli वैली अति मनोहारी है ।( २००KM)

२७ मई को रास्ते में अलकनंदा नदी में शक्ति माता धारी देवी और देव प्रयाग भागीरथी और अलकनंदा के संगम के पश्चात गंगा नदी का दर्शनकर देवभूमि दर्शनोपरांत ऋषिकेश भ्रमणोपरांत मैं देहरादून रात ८ बजे यात्रा समाप्त किया ।(१६०KM)

*नोट:- बद्री नाथ और गंगोत्री में कोई ट्रेक नहीं है पर मौसम किसी क्षण परिवर्तन हो सकता है । दिन का तापमान मई में ९ डिग्री सेल्सियस था पैट रात्रि में तापमान २ डिग्री तक पहुँच जाता है ।

केदारनाथ और यमुनोत्री सड़क मार्ग पर अवस्थित नहीं है जिसके लिए आपको ट्रेक करना होगा तापमान कमोबेश रात में २ डिग्री - दिन में ९ डिग्री के क़रीब था ।

मौसम की भविष्यवाणी करना बहुत ही कठिन है ।

गर्म क्लॉथ inner, जैकेट, रेनकोट, छाता, knee cap, दस्ताना, ट्रेक shoes, आवश्यक दवा या पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलिंडर आवश्यकतानुसार जरूरी है ।

Thursday, January 16, 2025

हिन्दी महीना के अनुसार वर्जित खाने की बस्तु

*भारतीय जलवायु में स्वास्थ्य के प्रकृति के अचूक नियम*


○चैते गुङ ○बैशाखे तेल, ○जेठे पंथ ○असाढै बेल ।

○सावन साग ○भादो दही , ○क्वार करेला ○कातिक मही,

○अगहन जीरा ○पुष धनिया, ○माघे मिसरी ○फागुण चना ।।।

○ ईं बारह से देह बचाय तो घर वैद्य कबहूँ ना आय ।।

                                       (ग्रामीण कहावत)


      ●हिन्दी भावार्थ 


   *बारह महीनों में अलग अलग वो ऐसी चीजें जिनका हम परहेज करके निरोगी रह सकते हैं।*


 *१) चैत  - गुङ नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इस महीने का नया गुङ पथ्य नहीं होता।*


 *२) वैशाख  - तेल नहीं खायें क्योंकि वैशाख में जो पसीना निकलता हैं उन छिद्रों को तेल अवरूद्ध कर देती हैं।*


 *३) ज्येष्ठ  - पंथ यानी पथ - रास्ता पर पैदल नहीं चलना चाहिए क्योंकि इस महिने गर्मी बहुत ज्यादा होने से शरीर डिहाइड्रेशन  में आ जायेगा।*


 *४) आसाढ - बेल फल बहुत गुणकारी होकर भी आसाढ में खाने योग्य नहीं होता।*


 *५) श्रावण  - सावण में पत्ते वाले आहार न लें क्योंकि इस मास में बरसात के समय पृथ्वी गर्भीणी होकर अदृश्य असंख्य जीव पैदा करती हैं जिनके अंडज पत्तों पर भी होते हैं।*


 *६) भादो - इस महिने में दही के जो पथ्य बैक्टीरिया होते हैं वो ह्युमिडिटी के चलते जल्दी जल्दी बढ़कर खतरनाक हो जाते हैं।*


 *७) आसीन- करेला आसीन में पकाकर खाने योग्य नहीं रहता। करेला पितकारक होता हैं।*


 *८) कार्तिक  - कार्तिक में मही यानी मट्ठा ना खायें क्योंकि कार्तिक से हमें ठंडा नहीं गरम आहार शुरू कर देना चाहिए।*


 *९) अगहन - जीरा ना खायें क्योंकि जीरा प्रकृतिगत ठंडा होता हैं। जबकि अगहन में ठंड ही होती हैं।*


 *१०) पौष - पौष में धनिया ना खायें क्योंकि धनिये की प्रकृति ठंडी होती हैं। सर्दियों के इन दिनों में गर्म प्रकृतिगत व्यंजन खाना चाहिए ।गर्मियों में सिर्फ धनिये के लड्डू बनाकर खावें।*


 *११) माघ - माघ में मिश्री ना खायें । मिश्री की तासीर भी ठंडी होती हैं जो गरम ऋतू में धनिये के लड्डुओं के साथ खावें हैं।*


 *१२) फाल्गुन- फाल्गुन में चना ना खावें । एकदम नया चना गैस कारक होता हैं। फाल्गुन में वायुमंडल में भी इधर-उधर की बिना ठिकाने की हवा चलती रहती हैं। मौसम भी कभी कैसा तो कभी कैसा रहता हैं। चना वैसे भी गैस कारक होता है ।*

  

*इस प्रकार अगर आप अपथ्य का पालन करेंगे तो शरीर को जरूर सुरक्षित रख पायेंगे।*

Monday, December 23, 2024

क्या खाना सेहतमंद?

*कहते है कि अति हर चीज की बुरी होती है।*


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*कोइ भी खाना अधिक न खाए ।अपने पेट से थोड़ा कम ही खाए।*

*ज्यादा खाना खाने से acidity  और gas`की समस्या हो जाती है।*


*सुबह के समय `दूध के साथ नाश्ता  करे, दोपहर को 12:00 से 2:00  बजे  के बीच खाना खाए, फिर  रात के समय 07:00 बजे तक खाना खा लेना चाहिए।*


*(ध्यान रहे खाने मे नाश्ते मे सलाद अधिक होना चाहिए)*


*कभी कभी कुछ चीजें बहुत मनपसंद होने के कारण हम बहुत ज्यादा खा लेते हैं, अगर आपने ज्यादा खा ली हैं तो कैसे पचायें--*


1- *केले की अधिकता में दो छोटी इलायची खा लीजिये।*


2- *आम पचाने के लिए आधा चम्म्च सोंठ का चूर्ण और गुड फाक ले।*


3- *जामुन ज्यादा खा लिया तो 3-4 चुटकी नमक खा ले।*


4- *सेब ज्यादा हो जाए तो दालचीनी का चूर्ण एक ग्राम खा ले।*


5- *खरबूज के लिए आधा कप चीनी का शरबत*


6- *तरबूज के लिए सिर्फ एक लौंग*


7- *अमरूद के लिए सौंफ*


8- *नींबू के लिए नमक*


9- *बेर के लिए सिरका*


10- *गन्ना ज्यादा चूस लिया हो तो 4-5 बेर खा लीजिये*


11- *चावल ज्यादा खा लिया है तो आधा चम्म्च अजवाइन पानी से निगल लीजिये*


12- *बैगन के लिए सरसो का तेल एक चम्म्च*


13- *मूली ज्यादा खा ली हो तो एक चम्म्च काला तिल चबा लीजिये*


14- *बेसन ज्यादा खाया हो तो मूली के पत्ते चबाएं*


15- *खाना ज्यादा खा लिया है तो थोड़ी दही खाइये*


16- *मटर ज्यादा खाई हो तो अदरक चबाएं*


17- *इमली या उड़द की दाल या मूंगफली या शकरकंद या जिमीकंद ज्यादा खा लीजिये तो फिर गुड खाइये।*


18- *मुंग या चने की दाल ज्यादा खाये हों तो एक चम्म्च सिरका पी लीजिये*


19- *मकई ज्यादा खा गये हो तो मट्ठा पीजिये*


20- *घी या खीर ज्यादा खा गये हों तो काली मिर्च चबाएं*


21- *खुमानी ज्यादा हो जाए तो ठंडा पानी पीयें*


22- *पूरी कचौड़ी ज्यादा हो जाए तो गर्म पानी पीजिय*


*अगर सम्भव हो तो भोजन के साथ एक/आधे नींबू का रस एक कप गुन गुने पानी में मिला कर पीजिये या भोजन में निचोड़ लीजिये , खाया पिया सब पच भी जाएगा और 8०% बीमारियों से भी बचे रहेंगे।*


(ज्यादे खाने से बचे)

Sunday, March 24, 2024

भारत की विकास का रोड़ा

 आज ७७ वर्ष बीत गए भारत का निर्माण हुए पर उसी समय चीन और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद असहाय जापान की तुलना में आज भी देश प्रगति का बाट जोह रहा है।

आज भारत का स्कील्ड, टेक्नोक्रेट, scientist, डॉक्टर आईटी पर्सनल और उच्च शिक्षा हेतु छात्र विदेश में पलायन को मजबूर हैं।यदि आपको भारत की स्थिति समझनी है तो कभी फुर्सत में समय निकालकर  इस प्लेटफार्म के सभी लोग जो अपने को शिक्षित या मध्यम वर्गीय कहते हैं वह सोंचे कि आप अपने बच्चे की शिक्षा सरकारी स्कूल में कराते हैं । हम में से कितने व्यक्ति निजी स्कूल से शिक्षा प्राप्त की है ? अब जब हमारी सरकारी स्कूल और सरकारी नौकरी प्राप्त हो गई तब क्या हमारे गाँव के लोग जो अधिकांश ग़रीब हैं वह सक्षम हैं कि वह निजी स्कूल में फ़ीस देकर शिक्षा के भारी भरकम राशि का वहन कर सके ।

हम जब व्यक्तिगत रूप में तुलनात्मक आर्थिक रुप से संपन्न हो गये तब देश प्रेम जाग गया । अगर सचमुच में देश प्रेम जाग जाता तो कितने अशिक्षित अपने ग्रामीण या घरेलू सेवक या अपने समाज के लोगों को हम शिक्षित कर पाये ।यही नहीं अलबत्ता हमलोगों ने स्वास्थ्य, शिक्षा और रोज़गार में अपने बच्चों को पिछड़ते देखकर हम में से कई ने निजीकरण की नींव के रूप में उच्च पैसे से बच्चों को शिक्षित करने के लिए निजी शिक्षण संस्थानों का ईजाद किया । इससे double फ़ायदा बिज़नस का और पैसों या सामंतबाद के पोषक के बच्चों के प्रतियोगिता में पिछड़ने पर कैपिटेशन फ़ीस और उच्च शिक्षा का नया दरवाज़ा खोलना । फिर जब अक्षम धनाढ्य के बच्चे पढ़ जायें और फिर सरकारी नौकरी में पिछड़ने लगे तो नौकरी के स्थान पर सरकारी पदों में कटौती के साथ निजीकरण कन्सल्टेंसी और सरकारी कार्यों को निजीकरण के हाथों में सौंपने का सुनियोजित व्यापार जिसका संचालन फिर वही अक्षम निजी क्षेत्रों से उच्च शिक्षा प्राप्त किए धनाढ्य के बच्चे CEO के रूप में व्यापार का मॉडल शुरू किया । इस व्यवस्था ने सभी मध्यम वर्गीय, ग़रीब किसान, मज़दूर के लिए शिक्षा और रोज़गार को सरकारी स्कूल की बदतर होती हालात ने ग़रीब से दरिद्र होने पर मजबूर करने लगा । यही नहीं किसान की घटती औसत समानुपातिक आमदनी और सरकारी सेवा में बेरोज़गारी ने लोगों को जीविकोपार्जन के लिए ही तड़फड़ाते रहना पड रहा है ।


हमलोग की देश सेवा  और देश प्रेम इतना मज़बूत है कि जब अपने बच्चों को भारत के निजी या सरकारी संस्थानों में शिक्षा या रोज़गार का योग्यता के अनुसार मासिक आमदनी नहीं मिलने पर बच्चों को GRE, TOFEL से वैदेशिक संस्थानों में शिक्षा प्राप्त कर विदेश या MNC में नौकरी के लिए प्रोत्साहित करने में लगे हैं। यह हम मध्यम वर्गीय व्यक्ति की एक प्रकार की मजबूरी भी सरकारी नौकरी या निजीकरण में योग्यता के अनुसार रोज़गार न मिलने पर बन गई है ।


अब प्रश्न है उद्योग का ? टाटा और बिरला समूह के उद्योग घराने को छोड़कर अधिकांश उद्योगपति के द्वारा देश के प्रकृति प्रदत्त पदार्थ, खनिज, समुद्र, पत्थर,  खाद्य सामग्री , कृषि उत्पादों का दोहन कर रोज़गार में लगे व्यक्ति की मजबूरी का शोषण कर उत्पाद का  मूल्य अधिक मुनाफ़ा पर व्यवसाय कर दिन दूना दूना तरक़्क़ी कर रहा है पर देश या पिछड़ेपन के लिए कोई भी सार्थक प्रयास नहीं की गई है या की जा रही है ।


*अब तो स्वास्थ्य चिकित्सा, जाँच और दवा भी कॉरपोरेट की गिरफ़्त में अपने जीवन को सौंप कर तमाशबीन बन कर मारने का इंतज़ार करने पर मजबूर होना एक मात्र मार्ग बच गया है ।*


*Public system का निजीकरण एक नये प्रकार की ग़ुलामी को जन्म देता है । निजी संस्थान या उद्योग तभी देश हित में रहेगा जब तक उसकी प्रतियोगिता सरकारी सक्षम संस्थान या अन्य निजी संस्थान की भी मौजूदगी होगी ।*

Monday, November 27, 2023

कार्तिक पूर्णिमा२०२३ का गंगा दर्शन और आस्था

 *कार्तिक पूर्णिमा २०२३ का गंगा स्नान का यथार्थ*


*आज संयोग से मैंने कार्तिक पूर्णिमा के दिन पटना से बख़्तियारपुर सुबह ६ बजे गंगा दर्शन के लिए सपत्नीक , बहन संग अतीत मंजर हेतु स्नान आदि से निवृत्त होकर ७ बजे गंगा घाट पहुँचने के बाद घाट भ्रमण एवम दर्शन कर पुनः छठ का ठेकुआ चाय लिट्टी खाने के बाद पटना लौटकर गाय घाट से दीघा घाट तक कई घाटों के गंगा दर्शन के पश्चात दोपहर बाद अटल पथ से पटना निवास पहुँचा ।*


*बचपन के गंगा दर्शन से यह दर्शन मुझे कौतुहल किया ।*


*१९७० के समय में गंगा स्नान में किसानों की ही बाहुल्यता होती थी । घाट पर खिलौने, बांसुरी, औरतों के शृंगार प्रसाधन की वस्तु, लट्ठो, तिलकतरी, दही, गुड, सत्तू, चुरा बिकता था । ढोल, मंदार के साथ औघाड़ का तांडव भय पैदा करता था । गंगा में कल कल ध्वनि के साथ जल प्रवाहित होता था । मंदिर में आने जाने का ताँता लगा रहता था । मुंडन कार्यक्रम के साथ ओझा, भगत का खेल अचंभित करता था ।वैसे मैं स्पष्ट कर दूँ कि बचपन के तीन वर्ष माता पिता और तीन बहनों के साथ मैंने अपने बख़्तियारपुर अवस्थित घर में समय बिताया था ।*


*इस वर्ष के गंगा दर्शन में सिर्फ़ कामगार मज़दूर वह भी पहले की तुलना में बहुत ही कम देखने को मिला । घाट पर दही, गुड, चूड़ा बिकते नहीं देखा और शृंगार प्रसाधन और साँख, लट्ठों, तिलकतरी के इक्का दुक्का ठेले को देखा वहाँ भी बिक्री न के बराबर । गंगा का पानी गंदा रंग के साथ ठहराव लिए था जो चीख चीख़ कर प्रकृति के विलुप्त होने की व्यथा बतला रहा था । सबसे विचित्र बात अल्प भीड़, इक्का दुक्का मुंडन मंजर के साथ कोई ओझा भगत का डांस तांडव का मंजर नहीं था । इस अंधविश्वास का स्वतः विलुप्त होना ग़रीबों में जागरुकता का अहसास करा रहा था जबकि सम्भ्रांत की ऊँगली में रत्न जड़ित अंगूठी भारत के विषैले नाग की सज्जा को सुशोभित कर रहा है ।मंदिर में आंशिक भीड़ कार्तिक पूर्णिमा या गंगा स्नान में ख़त्म होती आस्था का पहचान है या प्रदूषित गंगा का होना । अगर गंगा का प्रदूषण कारण होता तब छठ पर्व में गंगा घाट में भीड़ क्यों बढ़ते जाती! हिंदू के सोशल मिडिया पर ध्वजवाहक का गंगा स्नान में सर्वथा अभाव था । था तो सिर्फ़ गंदे पुराने कपड़े पहने मोटरी गठ्ठर के साथ आये आंशिक BPL सूची वाले लोग ।*


*आज कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान में मेरे जैसे और हिन्दू धर्म के क्षदम सोशल मीडिया के संभ्रांत सिर्फ़ राजनीतिक लवादा ओढ़े अपनी पत्नी पुत्र के साथ गाढ़ी निद्रा में लोगों को जाति धर्म के नाम पर आपस में लड़ाने में लगे थे और वास्तविकता से कोसों दूर रहकर सही सनातन वाहक के शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार से वंचित रखकर पीज़ा, बर्गर, केक, पेस्ट्री, मटन, चिकन, मछली, प्रोन, क्रैब की तैयारी में ऑनलाइन ऑर्डर के लिए मोबाईल से नूरा कुश्ती कर रहे थे ।*

Saturday, September 23, 2023

मनवता, मर्यादा और चरित्र (सनातन= सदा अनन्त)

 *मानवता, मर्यादा और चरित्र ( सनातन = सदा अनन्त)*

*बहुत हर्ष हुआ । हम विकसित भारत बनायेगें । आजादी के पूर्व के सेनानी की संख्या नभ जल अग्नि धरा में अधिकांश विलीन हो गई । कुछ बचे हैं जो विलीन होने की वाट जोह रहे हैं । स्मृतियाँ धुँधली है थोड़ी बहुत बची है उसे अल्ज़ाइमर्स नामक रोग ने शिथिल कर दिया है ।*

* …पर इतिहास है । इतिहास के भी कई रंग है … जो मौसम की तरह रंग बदलता है । क्या सनातन, सदा अंत न होने का यही बदलाव है जो एक दूसरे को कटुता के भाव से किया जाने लगा है ? क्या मर्यादा, नैतिकता, शालीनता में अमर्यादा, अनैतिकता, नफ़रत की चादर ओढ़ ली है । इसे ही सनातनी बदलाव कहते हैं ।*

*माफ़ करना मित्रों मुझे तो ऐसा दिखता या लगता है कि मैं अब हम नहीं हो सकता है । यह अंतर हम का मैं में बदलाव के कारण हुआ है ।*

*लगा था नया इंडिया न बाबा न …. भारत का नया संसद कई मायनों में अच्छा क्या उत्तम न …न श्रेष्ठ होगा । मानो हम लोकतंत्र संविधान से ऊपर हो गये हैं ! *

*बदलते भारत के नए नूतन विराट भवन में अशोक स्तंभ के स्थान पर सेंगोल ने जगह बना डाली ।मैंने सेंगोल को पहली बार नाम सुना था । हो सकता है, मेरा इतिहास का सामान्य ज्ञान बहुत कम हो , पर मुझे आशा है कि आप यह जरुर जान रहे होंगें कि सेंगोल प्रतीक का साम्राज्य अशोक स्तम्भ प्रतीक से कई गुणा अधिक होगा । वैसे तो अशोक स्तम्भ दक्षिण भारत के थोड़े बहुत क्षेत्र को छोड़कर वर्मा, भूटान, नेपाल से हिन्दूकुश पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान तक फैला हुआ था । आधुनिक भारत के नाम से पहला बदलाव सेंगोल के साम्राज्य की संरचना ने कर डाली *।

*नये भारत के नये संसद में भले प्रथम कार्यदिवस स्थानांतरण के समय प्रथम आदिवासी वंचित विधवा महिला राष्ट्रपति का प्रवेश नहीं हुआ पर यह कार्य एक विशेष सत्र के आमंत्रण से आनन फ़ानन में हिन्दी के भादो माह में विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के लोकतंत्र के प्रतीक प्रधानमंत्री के अभिभाषण  (आख्यान) से प्रारंभ हुआ ।*

*भाषण आपसी सद्भाव , भाईचारा, संसदीय मर्यादा, आचरण, नैतिकता बनाए रखने के बदलाव ने मन मश्तिष्क पर ऐसा प्रभाव डाला कि भारत सचमुच में बदल गया । संसदीय इतिहास में आधी आबादी उपेक्षित जनसंख्या के विल से भी सम्बन्धित था जो अचम्भित कर रहा था कि भले किसी कारणवश प्रधानमंत्री अपनी धर्मपत्नी का कई चुनावी हलफ़नामों में नाम न अंकित किया हो पर नारी शक्ति की कीड़ा उन्हें उद्विग्न कर रहा है ।*

*पर मुझे पुरुषों की मानसिकता पर संदेह रहता है कि क्या हम पुरुष नारी सशक्तिकरण में विश्वास रखते हैं भी क्या ? या ख़ाली दिखावटीपन ! संदेह मेरा उसी समय जड़वत हो गया; जब प्रथम महिला आदिवासी राष्ट्रपति का विशेष सत्र हेतु नये भवन में आगमन नहीं हुआ । मुझे सनातन में हो रहे बदलाव ने अचंभित कर रखा था पर यह भी जानता था कि सनातन में नारी शक्ति की ईश्वर के रुप में सर्वप्रथम आराधना पूजा होती है पर भौतिक रुप में अब तक उसे मौलिक रूप में अधिकार से वंचित किए जाने के सारे नियम विद्यमान हैं । मैं सोंच में था कि मुझमें भी वास्तविक रुप में कई बदलाव करने पड़ेंगें ।*

*ऐसा महसूस हो रहा था कि अब मुझे सही सनातन का ज्ञान हुआ है । बदलाव ! ….भादो माह में विशेष सत्र ! …..विशेष सत्र की कार्यमंत्रना में  गोपनीयता ! …..हिंदू प्रथम महिला आदिवासी राष्ट्रपति का नये सत्र के नये भारत के नये संसद भवन में प्रथम दिवस पर आगमन का न होना ! …. प्रधानमंत्री जिसकी पत्नी होते हुए महिला के रुप में भी निर्वासित रहने पर महिला सशक्तिकरण आरक्षण विल पर चर्चा !*

*अंत में विल दोनों सदनों में लगभग सर्वसम्मति से पारित हो गया परन्तु लागु कब होगा …. धरातल पर कब उतरेगा उसमें दो कील है । प्रथम परिसीमन और दूसरा सेन्सस अर्थात वर्तमान “क्या १० वर्षों में भी राधा को न तो नौ मन तेल होगा और न राधा नाचेगी” । जय हो सनातनी बदलाव !*

*अरे भाई ! यह क्या हो गया सनातनी प्रवर्तक के नेता बदलाव में इतिहास बनाये जाने के उद्देश्य से आज तक संसदीय इतिहास में जो नहीं हुआ बिदुरी जी ने संसद में ही ऐसा ही सदाचार, ज्ञान, आचरण, नैतिकता, मर्यादा रुपी ओज से ओतप्रोत आख्यान दिया कि हर्षवर्धन और रविशंकर सरीखे भूतपूर्व मंत्रियों ने मंद मंद मुस्कान से अपनी सहमति भी दे दी । जिस पर सदन के अध्यक्ष भी गौर से सुने।*

*सनातन बदलाव का प्रतीक …. यह है नयी मर्यादा! नई संस्कृति! नया सेंगोल! नया संसद! नया बिल!*

Friday, May 19, 2023

मगही में बोले जाने वाले शब्दों की प्रस्तुति

 बिहारी मगही में विलुप्त होते शब्दों के प्रस्तुति का एक तुच्छ प्रायस


कोठरी के ओसारा के ताखा पर ढिबरी बरते देखलूह । दालान, चूल्हानी, दूध आऊँटी घर कहाँ होब हई और राम राम के बेरा में किरिंग फ़ुटे से पहले डोल डाल के बाद दतमन से मुँह धोके या बसिये मुँह दोसर दुहारी के ओसरा में तातल तातल चाह पीलू ह ।मुँह जूठा कईले बिन  ब्रह्म बाबा के गोड़ लगलहू ह । ढेलवा गोसाईं पर स्कुल जाय के बेर में एक ढेला रोज़ रखहल्हू ! डीह केकरा कहल जा हई । साँझ मयीया या उत्तर तरफ हाथ उठा के किरिया खयीलुह । पीलुआही, बीहुनाठी, मँगजरऊनी, भुईयाँ, भुसुल्ला, बढ़नी, पीरदायीं, तसला, बटलोही, बरगुना केकरा के कहल जा हई । लबर लबर बोले के लूर हो का । हुमच के खटिया पर चेथरी तीतल अंगा पहन के बैठल पर डांटलगेल हल कि बच गेलहू हल ।ओरचनी तरफ़ मुड़ी राहतयी की पैर? केकरो हऊँकल्हू ह कि तू ही हऊँकागेलहु ह । भोथर   आमदी और भोथर औज़ार देखल्हू ह की न देखलह । केकरो गर्दा उड़ाते या अपने केकरो हऊंके है और फिर कूटइलह ; ईं भुने भुने न बताहू, किरीया खाए पड़तो । तू बहुत भीतरघुनिया हू जी एकरे चलते तो नीमन तरी से थूरा जाह । बनातरीके आजहनोग ला हमरा बढ़िया तरी से तू नहिये समझलूह । तरकारी खाये से मुँह परपरयीलो ह ? घूँट घूँट पीह न कि गटर गटर । अरे मरदे छाँक लगा के मत पी हो ! एतना गरम हऊ कि तेतरा या सेंका जयितऊ । भकूआ के काहे घूरहें अलबलाल नीयर ? हदसल लगहो ।सवलबा पूछे पर अलवलाहीं हो तब तो परीक्षवा में ख़ाली टीप होतहू । कने बरीअरी ठोकलहू ह । आज अघा के ख़ायीलूँह । बसियाल औराल भात कहीं तरकारी साथे कोई खा हई । अरे गींज मथ मत ।भोथर पिरदायीं जेकरा से रामतोरयी न कटहयी ओकरा से कपड़ा में चीरा या सुतरी कटतई । इम साल एकदम सुतार हई न तो परसाल नियर रहत हल त दमे निकल जयितहोत ।बरियारी मत करहीं । एकदम अघालहू । बकलोल के फेर में मत रह न तो ठेहुना घीस जयीतो, फिन फूटे में देरो न लगतो । केहुनिओ मत न त खीस बरतउ तब केकरो पछाड़ देबऊ । लफ़ूअन सब के घूरे के बेमारी रह हई, एकरे में दू तबडाक़ लग जयितयी न त एकदम निशे फट जईतयी । सीक चकरी,घिरनी, डोल पत्ता, चीक्का…. से पैर में विवायी फटलो ह ? मिज़ाज गरम होलो न त हम केकरो न छोड़वो । हट मरदे! बिना मूँछ के मरदनवा ज़्यादा मटकी मारहो जी । छिनरा नियर लगहो ! सेखारी, अमनीया जानहू कि उलट पुलट करदेभू त मायीया छोलनी से दाग देथून । लंठई करबहू न तब फँसबहू न त घरे लोटा लोटा के थूरईब । अहरी, गहड़ी में मछली मारव न कि बँशी लेके या कादो में से मछरी मारते देखे में बड़ी नीमन लगहयी आऊ मजो अयीतो । होरहा, अलंग, डीह, राहर रेंडी के ख़ेत के बाते कुछ और रहहयी । बग़ीचवा में टिकोलवा चोरावे के और लटायीन से तिलंगी या गुड्डी बू कट्टा करे में बड़ी मजा आयीतो । माटरसाहब भुने भुने छऊँडी से बुरी बुरी बात करे पर सिट्टी तोड़ देलथीन और फिर छऊँड़ा के रेगनी के काँटा पर सुता के हाऊँक देलथीन ।


*नालिन कुमार सिन्हा*

Saturday, January 28, 2023

35 वर्ष 6 माह के पश्चात सरकारी सेवा में समापन के अनुभव के साथ लगभग अंतिम प्रणाम और आशीर्वाद

*ग्रामीण कार्य बिभाग अंतर्गत मेरे सरकारी सेवा के 14 वर्ष 6 मास (कुल 35 वर्ष 6 माह) के पश्चात सरकारी सेवा में समापन के अनुभव के साथ लगभग अंतिम प्रणाम और आशीर्वाद*


*कई चैलेंजिंग दायित्वपूर्ण पदों पर आसीन रहकर निष्पक्ष भाव से मैंने सरकारी सेवा की 35 वर्ष 6 माह की यात्रा का अवसान 31 जनवरी 2023 को निर्धारित है ।सरकारी सेवा की निर्वासन की तिथि जन्म के दिन ही निर्धारित हो जाती है ।


*मुझसे कई क्षेत्रीय या यहाँ तक मेरे बैच के मित्र भी मुझसे भयभीत रहते थे । मैंने बिभाग में क्या किया वह सभी सफेद पन्नों पर रंगीन स्याही से मार्क के रुप में मिलेगा । इसका मूल्यांकन आप सभी करते होंगे ।*


*ग्रामीण कार्य बिभाग अंतर्गत क्षेत्रीय अभियंता के रुप में मैंने 6 वर्ष मसौढ़ी और कटिहार में सेवा की । शेष अन्य 8 वर्ष 6 माह मैंने मुख्यालय में परियोजनाओं का सूत्रण और अनुश्रवण में सेवा दी है ।*


*आज की चुनौती को  मेहनत, लगन, समयबद्धता, निष्पक्षता, निर्भयता, कर्मठता से ही सामना कर सरकारी सेवक के रुप में सफल हो सकते हैं ।*


*अब जाते जाते मेरी जो आदत है उसको हम छोड़ नहीं सकते हैं । इसलिए बिभाग के लिए मैं अंतिम सलाह दे रहा हूँ ।*


*कई चीज आपके वश में नहीं है जो वश में है उसे ही नियन्त्रण कर सकते हैं अन्यथा अगर आप दूसरों के आसरे पड़े रहे तब आपको गड्ढा में गिरने से कोई बचा ही नहीं सकता है । प्रत्येक व्यक्ति में कई कई अच्छे गुण होते हैं उन गुणों को हमेशा तराशने की आवश्यकता होती है । छोड़ देने पर औजार तक भोथर हो जाता है ।*


*सर्वप्रथम जिस योजना का DPR तैयार करना है उसका स्वयं स्थल निरीक्षण कर आवश्यकताओं को लिख लें । DPR परामर्शी आपको सहायता करता है । DPR के PROVISION में कमी, गड़बड़ी के लिए आपको ही जवाबदेह माना जायेगा । पथ के आरेखन में UTILITY SHIFTING, पब्लिक या इंडस्ट्रियल भवन के लिये भी पहुँच पथ का PROVISION करें । नाला के OUTFALL पर जरुर ध्यान दें । कभी भी OPEN AREA में कंक्रीट पथ का प्रावधान न करें । CD वर्क का TYPE, SITE और SIZE पर विशेष ध्यान दें । सरकार के न्यूनतम खर्च से नए तकनीक के आधार पर DPR तैयार करें । निर्माण कार्य के समय चौकस रहें । PROVISION के अनुसार निर्माण कार्य करे । अगर तकनीकी फेरबदल की आवश्यकता महसूस हो तो सक्षम पदाधिकारी से स्वीकृति प्राप्त कर लें । ऐसा नहीं कि SURFACE DRESSING के स्थान पर MSS अथवा MSS और SDBC के स्थान पर एक ही लेयर जोड़कर कार्य करा लें ।*


*Ist tier गुणवत्ता जांच और उसकी प्रविष्टि पंजी में करना field Engineer की जवाबदेही है । पथ में प्रयोगशाला और बिना information के साथ citizen board के कार्य प्रारंभ न की जाय । हर लेयर में निर्धारित स्थल जांच कर पंजी में संधारित करें । स्थल पर संवेदक के Engineer की उपस्थिति अनिवार्य है जिसके लिए संबेदक को force करें । Stage passing के साथ कार्य करना है अर्थात यदि नीचे के कार्य  मिट्टी के बाद GSB और WBM III है तो उसे पूरी लम्बाई में करने के बाद ही ऊपर के लेयर का कार्य करे। मिट्टी कार्य और SUBGRADE के कार्य के दौरान PUCCA STRUCTURE का कार्य कर लिए जाएं ।*


*GSB के ग्रेडिंग और SCREENING MATERIAL के साथ THICKNESS के लिए यदि 200MM का प्रबधान हो तो  LOOSE 150 MM का पहला LAYER डालकर COMPACT करें फिर 150 MM का दूसरा LAYER डाल कर COMPACTION करें । 8 PASS ROLLER EDGE से 4-4 बार दोनों तरफ से चलने पर CAMBER बन जायेगा । CAMBER का निर्माण मिट्टी से ही बनाते जाएं अन्यथा ऊपर के लेयर मंहगा होने के कारण THICKNESS में संबेदक चोरी कर सकता है । GEOMETRIC DESIGN पर विशेष सतर्कता बरतें । GSB के SCREENING MATERIAL में DPR के अनुसार COURSE SAND अर्थात ढलाई वाला बालू या स्टोन डस्ट ही दें । यह पथ का FOUNDATION है ।*


*WBM III में जितना प्रॉपर SIZE का पत्थर लाएगा उतना ही ECONOMICAL रोड बनेगा । बड़ा पत्थर में THICKNESS और INTERLOCKING की समस्या होगी साथ ही बड़ा पत्थर विशिष्टि के अनुकूल नहीं है । बिना स्क्रीनिंग MATERIAL के 4 इंच LOOSE 63MM DOWN पत्थर बिछवावें । इसके बाद HAND PACKING कराइये साथ ही साथ THICKNESS की CHECKING के लिए 100 MM का लकड़ी का CUBE आरेखन में यत्र तत्र रख दें । LOOSE पत्थर के समय CUBE डूब जाना चाहिए । अब 8 PASS DRY ROLLING करवाइए। इसके बाद SCREENING MATERIAL टोकरी से छींटवाकर लोहे के BROOM से फैलाइये , VOID भरकर INTERLOCKING हो जाएगा तब जाकर फिर 8 PASS  टैंकर से पानी छीटवाकर WET ROLLING करवाईये । अंत में कम से कम बिटुमिनस कार्य करने के एक सप्ताह पूर्व प्राइम कोट इमल्शन, बिना पानी मिलाए, WBM III के ऊपर दही ऐसा THICK डालें जो कम से कम HALF या 1/3 RD नीचे के परत तक PENETRATE कर दे । एक सप्ताह बाद TACK COAT करने के साथ साथ PROPER GRADE और TEMP के साथ बिटुमिनस कार्य PROPER ROLLING और उचित मात्रा की अलकतरा के साथ कार्य कराएं ।*


*अक्सर ग्रामीण कार्य बिभाग अंतर्गत SHOULDER में कार्य नहीं किये मिलते हैं या बेतरतीव । प्रत्येक लेयर के साथ FLANK का कार्य PROPER COMPACTION के साथ कराएं । RIGID/ FLEXIBLE PAVEMENT में FLANK नहीं होने पर EDGE BISCUIT की तरह टूट जाता है। SHOULDER हर हालत में बनने चाहिए ।*


*एक समस्या रैयती जमीन की है । रैयती अर्थात private land रहने पर भूमि अधिग्रहण अनिवार्य है । इसके दो तरीके हैं । सतत लीज नीति या भू अधिग्रहण । सतत लीज के लिए रैयत धारों की सहमति और जिलाधिकारी की अध्यक्षता में six man committee की स्वीकृति अपेक्षित है । अगर रैयतधारों में से कोई एक भी सहमति न दे तो जिलाधिकारी को भूमि अधिग्रहण का अनुरोध करें । अंत में दोनों बिधि में से किसी एक की पूरी प्रक्रिया समाप्त कर मुआवजे की राशि की मांग की जाए ।*


*दक्षिण बिहार में black cotton soil है जिसमें earth work, cloud breaking, करने के बाद compaction करें । यदि आवश्यक हो तो local sand या water स्प्रिंकल करते हुए परत दर परत मिट्टी का संपीड़न पूरी चौड़ाई में की जाय और sub grade soil का 200mm परत shoulder तक proper compaction के साथ कार्य कराएं अन्यथा पथ बनने के बाद रोड फट जाएगा ।*


*Rigid pavement एक challenging कार्य है । सर्वप्रथम Mix design कराएं साथ ही साथ कार्य स्थल पर सभी आवश्यक उपकरण होने चाहिए उसमें vibrator roller -2 न्यूनतम रहने होंगे 1 plate vibrator, बिना plastisizer के कार्य न कराएं । rigid pavement कार्य के लिए संवेदक से Transit Machine का उपयोग करने के लिए बाध्य करें । बिना Transit machine के quality achieve करना मुश्किल है । M30 के लिए स्वयं स्थल पर SLUMP TEST और प्रतिदिन CUBE TEST करें । दोनों छोर में STEEL SHUTTERING रहना अनिवार्य है । स्टोन मटेरियल का ग्रेडिंग प्रॉपर हो न कि एक ही आकार 5/8 एंड DOWN SIZE पत्थर रहने और WATER CEMENT RATIO कम करने के लिए ADMIXTURE या PLASTISIZER का प्रयोग नहीं करने पर M30 ACHIEVE करना नामुमकिन है । कॉन्ट्रेक्शन JOINT CASTING के 24 घन्टे के बाद अर्थात दूसरे दिन काम शुरु करने से पहले प्रतिदिन ONE THIRD मोटाई में कटिंग निश्चित करें अन्यथा TEMP VARIATION या वाहन के चलने से BISCUIT की तरह पथ टूट जाएगा । यह ऐसा गलती है कि OPEN EYE से भी दिखता है । बिना ROAD SAFTEY या SIGNAGE BOARD (Retroreflective), KILOMETER POST, HECTOMETER POST, Edge Marking with glass बीड्स and proper thickness के पथ uncomplete कहा जायेगा ।*


*दैनिक/ साप्ताहिक/मासिक/वार्षिक प्रगति के लिए प्रमंडल अंतर्गत चल रहे राज्यस्तरीय योजनाओं के लिए MIS पर प्रशासनिक, तकनीकी स्वीकृति से लेकर निविदा, एकरारनामा, भौतिक प्रगति, वित्तीय प्रगति, अंतिम विपत्र भुगतान आदि की प्रविष्टि MIS और PMGSY के लिए OMMS के विभिन्न मॉड्यूल मेंबरुटीन रुप में करिए ।*


*बाह्य या आंतरिक ऋण से संचालित योजनाओं के लिए सूद की राशि का बोझ भी राज्य को वहन करना  पड़ता है । ऐसे में WB, NDB, NABARD की योजनाओं के क्रियान्वयन में विलम्ब आपको गम्भीर परिणाम के लिए उत्तरदायी बना सकता है । इसके लिए योजना के चयन से लेकर प्रत्येक गतिविधि में विशेष ध्यान देना चाहिए । किसी जनप्रतिनिधि या व्यक्ति को संतुष्ट करने के लिए एकल सम्पर्कित बसावट के लिए पुनः  दोहरी सम्पर्कता के लिए योजना तैयार न की जाए । सम्भव है कि सरकार द्वारा भविष्य में दोहरी सम्पर्कता की योजना भी चालू की जाय । अतः वर्तमान में एकल सम्पर्कता के सिद्धांत और पुल के लिए लम्बाई और UP STREAM, DOWN STREAM में संरचना के अध्ययन के पश्चात ही योजना बनाई जाय, न कि एक या दो या तीन गांव के लिए 9 करोड़ का HL BRIDGE बन जाए ।*


*वर्तमान में जन प्रतिनिधि एक चुनौती के रुप में खड़ा है जो आपको परेशान कर रहा है । नियमानुसार, निष्पक्षभाव से सभी के साथ सामान नीति ही इसका एकमात्र निदान है । यदि एक काम किसी का कर दिए वह व्यक्ति सर पर चढ़कर बदनाम करेगा । इसलिए सभी जनप्रतिनिधियों के साथ निष्पक्षभाव , निरपेक्ष होकर निर्भीकता के साथ कार्यो का निष्पादन करें । विशेषकर निविदाओं के क्रम में, आपको ईमानदारी से निष्पक्षता के साथ चेकलिस्ट बनाकर भेज देना है । इसमें संलिप्त नहीं होना है , आप सभी को संतुष्ट नहीं कर सकते हैं और निविदा की निष्पक्षता, पारदर्शिता, समयबद्धता, एकरूपता, प्रतिद्वंदिता में भेदभाव उजागर हुआ तो सरकार कठोर निर्णय लेगी और सभी गलती आप के ऊपर मढ दिया जाएगा । कई लोगों में निष्पक्षता और पारदर्शिता का अभाव साफ दिखता है, कई लोग निविदा प्रबन्धन में संलिप्त दिखते हैं कारण जो भी हो, मैं तो अब जा रहा हूँ लेकिन ऐसी आदत बुरी है जिसे आप बदल दें अन्यथा गम्भीर परेशानी का शिकार हो सकते हैं । सरकारी कार्य में प्रतिद्वंदिता को कम करने से राज्य को वित्तीय हानि होती है । इसलिए निविदा में प्राप्त बिड लिफाफा को खोल कर ईमानदारी एवम निष्पक्षता के साथ आंकड़ों को भरकर सक्षम पदाधिकारी के पास भेजें । निविदा निविदा मत खेलें अन्यथा हाथ ही नहीं पूरा शरीर बुरी तरह से जल जा सकता है । इसको मेरी चेतावनी समझें या मेरा अनुभव ।*


*कार्य की गुणवत्ता या वर्क प्रोग्राम के अनुसार समयबद्धता के साथ संवेदक की गड़बड़ी दृष्टीगोचर होने पर एकरारनामा की सुसंगत कंडिकाओं का उल्लेख करते हुए email के माध्यम से एकरारनामा करने से लेकर 5 वर्षीय अनुरक्षण हेतु लिखें । नोटिस देने पर भी संबेदक शिथिलता बरते तब प्रेस नोटिस निर्गत कर एकरारनामा के तहत अनुशासनिक कारवाई करें आवश्यक हो तो एकरारनामा न करे तो सिक्योरिटी जब्ती, शिथिलता बरते तो डिबार या एकरारनामा विखंडन । अपने सिर पर संबेदक के जुर्म को लेकर न घूमिये । यही एकमात्र एक tool है जिससे गुणवत्तापूर्ण समय से कार्य कराया जा सकता है । एकरारनामा के तहत की गई कारिवाई के लिए STATE SBD की स्थिति में SE/CE/ TRIBUNAL को ही अपील किया जा सकता है जबकि PMGSY, MR के CASE में EMPOWERED COMITTEE HEADED BY SECRETARY.*


*प्रत्येक कार्य के लिए SIGHT ORDER BOOK, यदि आवश्यक हो तो REINFORCEMENT REGISTER, गुणवत्ता पंजी 1 एवम 2 अनिवार्य रुप से कार्य प्रारंभ के साथ कार्यपालक अभियंता के हस्ताक्षर से खुलना चाहिए । किसी योजना में किसी स्तर का कोई ATR OMMAS या MIS या सूचना प्राप्त हो तब ईमेल के माध्यम से उसकी सूचना संबेदक को तुरन्त देते हुए एक मास में त्रुटि का निराकरण हेतु हिदायत देते हुए न करने पर सम्बन्धित कंडिका के अनुसार अनुशासनिक कारिवाई हेतु लिखें । पुनः स्मार दें और यदि गुणवत्ता में सुधार न करे तो प्रेस नोटिस कर एकरारनामा बिखण्डन कीजिए । बीमारी का इलाज करें न कि बिभाग के सिर पर दिखने के लिए छोड़ दें ।*


*गुणवत्ता के लिए स्वयं SIEVE ANALYSIS, COMPACTION TEST, BITUMEN CONTENT TEST, COMPRESSIVE STRENGTH TEST स्थल पर ही चेक करें ।*


*पुलों के निर्माण में विशेष सावधानी बरतें । SITE SELECTION में विशेष समय लेकर PROPER LAY OUT करें यदि आवश्यक हो तो SE की उपस्थिति में इस कार्य को करें। REINFORCEMENT की 100% चेकिंग के लिए EE जवाबदेह हैं CONCRETE, WEEP HOLE, FOUNDATION DEPTH के लिए AE JE के साथ साथ EE भी जवाबदेह हैं । सभी प्रकार के संरचनाओं में TATA, VIZAG, SAIL के अलावा दूसरा स्टील प्रयुक्त न की जाय यदि पकड़ा गया तो न्यूनतम निलंबित । CEMENT 43 ग्रेड OPC का ही प्रयोग करें । BATCHING PLANT या TRANSIT MACHINE से ही कंक्रीट की CASTING करें । स्थल पर COMPRESSIVE TESTING MACHINE से लेकर सारे उपकरण मौजुद रहने चाहिए और प्रतिदिन के कंक्रीट का CUBE बनाकर DATE अंकित कर स्थल पर ही VAT में CURING के बाद 7-15-28 दिनों का Compressive STRENGTH TEST कर पंजी में दर्ज करें । प्रत्येक स्टेज में REINFORCEMENT का SPACING और DIA चेक कर REINFORCEMENT पंजी में अंकित करें । PILE KA DEPTH Check और PILE CUTTING में बेंटोनाइट का प्रॉपर प्रयोग आवश्यक है । कम से कम एक मीटर PILE ढलने के बाद ऊपर के हिस्सा को तोड़कर PILE CAP का कार्य करें । WEEP HOLE STAGGERED और PROPER रुप में ABUTMENT और RETURN WALL में होने चाहिए । PILE लोड टेस्ट किया जाना अनिवार्य है । SUPERSTRUCTURE और SUBSTRUCTURE में SHUTTERING,PROP DISTANCE अर्थात CENTRING में कमी दिखने पर ढलाई के समय ही संरचना ढह जाता है । ढलाई के पूर्व सेंटरिंग के SPACING, BRACING और SHUTTERING को अनिवार्य रुप में चेक कर लें ।*


*दोस्तों अब आप कहिएगा कि जाते जाते भी छोड़ नहीं रहा है ।*


*आज मैं जो कुछ भी हूँ अपने अधीनस्थों के अथक परिश्रम  और सचिव महोदयों के दिशा निर्देश के चलते । एक व्यक्ति का किसी संस्थान में कोई महत्व नहीं होता है यह तो मेरे उच्चपदाधिकारियो और मेरे अधीन करनेवाले विभिन्न पदाधिकारी और कर्मचारी गण की मेहनत का परिणाम है कि मैं कुशलता से सेवानिवृत्त हो रहा हूँ । हमसे कई गलतियां हुई होगीं कई लोगों को हमसे दुःख पहुँचा होगा । मैं किसी गलती के कारण किसी व्यक्ति को कभी भी PREJUDICE  नहीं मानकर उसके साथ दुराग्रह नहीं रखा अलबत्ता कई को अनुशासनिक या अनहोनी कारवाई से पहले सचेत जरुर किया है ।*


*आपका अगाध प्यार और स्नेह जो मिला उसको मैं वयान नहीं कर सकता हूँ । मैं जानता हूँ कि आप मुझे एक सख्त पदाधिकारी के रुप में जानते हैं । मुझसे कई को यदि दुःख पहुँचा है तब मैं अपने शरीर के रोम रोम से माफी मांगता हूं लेकिन आपने जो मुझे सम्मान और प्यार दिया है, उसको इस जीवन में लौटाना असम्भव है । आप सभी मेरे ह्रदय में है जिसे भुलाना भी चाहूँ तो भूल ही नहीं सकता हूँ । एक बार पुनः सभी को प्यार भरा नमस्कार*💐💐🙏🙏

Friday, October 1, 2021

साक्षात्कार मेरिट दबाने की तरकीब

 आधुनिक भारत में मेरिट suppress करने का हुनर साक्षात्कार


भारत में जातिवादी पक्षधरता सदियों से एक बड़ी आबादी को शिक्षा एवम अन्य विकास के मानकों से किनारे करते रही है और भारतीय संविधान के बाद थोड़ा बहुत जो हक उपेक्षितों को मिलना शुरू हुआ उस को खत्म करने के लिए भांति-भांति के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। सरकारी सेवा में बहाली पर लिखित परीक्षा के बाद साक्षात्कार का होना वंचित रखने का बेजोड़ हथकंडा है। 2021 के केंद्रीय लोकसेवा आयोग के टॉप 10 अभ्यर्थियों के लिखित और साक्षात्कार पर नजरें इनायत कर लें। दूध का दूध और पानी का पानी अलग दिख जाएगा ।नम्बर 1 पर जो शुभम कुमार हैं, ओबीसी वर्ग के हैं। उन्हें लिखित परीक्षा में 878 अंक मिले मगर साक्षात्कार में मात्र 176 दिए गए। वहीं नम्बर 2 पर जागृति अवस्थी को लिखित परीक्षा में 859 अंक मिले जबकि साक्षात्कार में 193। अंकित जैन को लिखित परीक्षा में 839 और साक्षात्कार में 212 अंक की कृपा हुई मगर 5 नम्बर पर ममता यादव को लिखित परीक्षा में 855  अंक तो मिले मगर साक्षात्कार में 187 दे दिया गया। यह है साक्षात्कार का खेल। इस देश में साक्षत्कार खुलेआम बेईमानी करने का अड्डा है । ऐसे में किसी भी चयन में मात्र लिखित परीक्षा होनी चाहिए और अभ्यर्थियों के नाम के बजाय, कोड नम्बर लिखा जाना चाहिए। साक्षात्कार मतलब भाई-भतीजावाद। अपनों का चयन। न्याय की हत्या।

Sunday, July 25, 2021

जीवन सहचरी के साथ संस्मरण

 जीवन सहचरी संग संस्मरण (अपने पर रूपांतरित)


(कोविड संक्रमण काल में सभी पति पत्नी को समर्पित)


तुम जब मेरे जीवन -बंधन में बंधी तो मैं यह दावे के साथ कह सकता हूँ कि मैं तुम्हारी पहली पसंद  था क्योंकि   पसंद बनाने की भी एक न्यूनतम उम्र होती हैं और तुम उस उम्र में प्रवेश करने के पूर्व  ही मेरे जीवन में प्रवेश कर गई थी । हां, लेकिन इतना  जरूर कहूँगा कि तुम्हारे पहले भी मेरे कई पसंद सृजित हुए थे परंतु यह पता नहीं चल सका था कि जिन जिन को पसंद किया था वो मुझे पसंद करते थे या नहीं । एकतरफा पसंद भी कोई पसंद थोड़े ही होता है । यह जब दो तरफा हो तभी तो मुकम्मल होगा न । खैर! जो भी हो आज विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि तुम मेरी पहली पसंद बन चुकी हो बल्कि ज्यादा उपयुक्त तो यह मानना होगा कि तुम ही ने अपने प्यार स्नेह सेवा से तूने अपने को मेरी पहली पसंद बना दिया अर्थात दो तरफा यानि एक मुकम्मल पसंद ।


    मुझे तुम्हारे प्यार से ज्यादा तुम्हारा तकरार पसंद  है।  तक़रार न हो तो फिर रूठे कौन और मनाये कौन। तक़रार ही तो प्यार को प्रगाढ़ बनाता है परस्पर क्षमा करने की शक्ति पैदा करता है। मेरा, तुम्हें  उकसाना, फिर तुम्हारा चिल्लाना, घर को सर पर उठाना,कभी कभी बच्चों से  कसम दिलवाने के लिए चिल्लाना, कठोर वचन बोलना, दुबारा नहीं बात करने की कसमे खाना, कभी कभार अप्रिय शब्दों  से मेरा संबोधन करना, सब एक मनोहारी छवि प्रस्तुत करता है। अंततः सारे क्रोध को  तुम्हारे आंखों से प्रवाहित होते देखते ही एक तड़प महसूस करना,  फिर तुम्हारे पास जाना, तुम्हें मनाना और तुम्हारे द्वारा, नहीं मानने का झूठा अभिनय  करना, मेरे साॅरी कहने पर अंदर अंदर ही गर्व से इठलाना, फिर  तुम बिना श्रृंगार के ही संसार की अनुपम सुंदरी दिखने लगती हो। ऐसे भी तुम्हें कृत्रिम श्रृंगार पसंद नहीं है इसीलिए मैं जब कभी कहीं बाहर गया हूँ तो कभी भी चूडियां, विंदी, सौंदर्य प्रसाधन का कोई सामान उपहार के रूप में तुम्हारे लिए नहीं लाया हूँ और तुमने कभी मुझसे ऐसी अपेक्षा भी नहीं की। तुमने अपने आचरण से मेरे मन में कब का संदेश दे दिया था  कि "मैं "ही तुम्हारे लिए भगवान का दिया हुआ अनुपम और सर्वोत्कृष्ट  उपहार हूँ ।


  मालूम है तुमको कि मुझे तुम्हारी तक़रार ही क्यों पसंद है? ताकि तुम अपना भरपूर प्यार घर के अन्य सभी सदस्यों और सगे संबंधियों पर न्योछावर कर सको। तुमने आजतक ऐसा किया भी है। कोई भी मेरा सगा संबंधी ऐसा नहीं है जो तुम्हारे प्यार और स्नेह से सिंचित न हुआ हो, थोड़ी सास पूतोह में .. घर के बाहर की मेरी छवि को चार चाँद लगाने या अन्य विशेषण का श्रेय सिर्फ तुमको ही तो जाता है इसमें मेरा कोई योगदान नहीं। जब बाहर में सगे संबंधियों से तुम्हारी तारीफ सुनता हूँ तो मुझे ऐसा लगता है कि तुम्हारा व्यक्तित्व हमारे व्यक्तित्व से कई गुणा अधिक ऊँचा है। सबों की पहली पसंद कोई यूँ ही  थोड़े बन जाता है। 


  तुम्हारा किचेन अद्भुत है कौन सा ऐसा व्यंजन है जिसका रसास्वादन तूने हमसबों को नहीं कराया है वह भी पल झपकते ही। आगंतुकों ने भी इसका भरपूर आनंद उठाया है ।


 आजकल कोविड के संक्रमण काल में मैं घर में हरदम साथ हूँ तुम्हारे हर आदेश निदेश  का पालन कर रहा हूँ थोड़ी बहुत आपत्ति के साथ। घर के बाहर वगैर मास्क नहीं जाने, सेनिटाईजर साथ में रखने, सावधानियां /दुरियां रखने की , भीड़ भाड़ में नहीं जाने की सख्त हिदायतें,  बारबार हाथ धोने की तुम्हारी सलाह और उसका सख्ती से पालन कराना, अफसोस पहली टीका के बाद भी तुम कोविड संक्रमित हो गई। इसका सही सही कारण ढूँढ नहीं पाया। तुम्हारे बिमारी के समय एक समय ऐसा आया कि कहीं मैं तम्हें खो न दूं । आज भी सारी घटनाएँ आंखों में तैर रही है । कुदरत ने आखिर मेरी या तुम्हारी या अपनी सुन ली जिसका परिणाम है कि तुम धीरे धीरे स्वस्थ हो रही है । मैं अपने चाहनेवालों का शुक्रगुजार हूं जिन्होंने विपदा के समय साथ या दुआ मांगी । 


टहलता हूँ व्यायाम भी करता हूँ, नहीं करने पर तुम्हारी डांट भी सुनता हूँ। शायद तुम्हें लगता होगा कि मैं तुम्हारी डांट से तथा कोरोना से डर गया हूँ ; नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। मुझे कोरोना से उतना डर नहीं है जितना कि तुमसे अलग होने का डर, तुम्हें अकेले छोड़ जाने का डर।


मेरा स्वस्थ रहना, तुम्हें साथ देने के लिए, सहयोग देने के लिए, एक अपरिहार्य आवश्यकता है ऐसा ही मैं सोचने लगा हूँ ।

मुझे स्वस्थ रहना है तुम्हारे लिए, तुम से तकरार करने के लिए, रार करने के लिए, तुम्हारे लिए।  तुम हमारे जीवन की निरंतरता को बनाये रखने की अनमोल प्रेरणा और अभिप्राय हो। सदा सहायक रही हो, सदा सहायक रहना, यही तुमसे मेरी अपेक्षा है । जैसे सभी संकट टल गए, यह भी टल ही जाएगा। फिर वही राग, वही दिनचर्या ,वही रफ्तार वापस आएगी ।

 

शायद मेरी पसंद तुम्हें अब समझ में आ गया होगा कि तेरे साथ से अधिक  कोई भी वस्तु मुझे प्रिय नहीं हो सकती ।


         और नापसंद की जहाँ तक बात है तो तेरी आंखों में आंसू बिल्कुल अच्छे नहीं लगते, फिर भी कभी-कभी आंसू आने भी चाहिए इससे हृदय को पिघलने में मदद मिलती है मगर इसको अधिकांश वक्त में  जब्त ही रखने की कोशिश करना  ।मुस्कान देने की गारंटी मैं लेता हूँ ।

 

एक बात मुझे आजतक समझ में नहीं आयी कि तुम्हारी पसंद क्या है? एक बार नई नई शादी के बाद एक साड़ी लाया था जिसे तुमने नापसंद कर दी थी और कभी कभार बहुत मन्नत पर तुम साड़ी पहन लिया करती थी । इसके बाद मैंने कसम खा ली कि मैं तुम्हारे लिए कोई उपहार नहीं लूँगा । पर इधर देश या विदेश में अकेले सरकारी बैठकों या प्रशिक्षण में सम्मिलित होने पर कुछ उपहार ले लेता हूँ पर अभी भी खराब लाने के उलाहना से नहीं उबरा हूँ ।

  तुम्हारे साथ कई देशों के सुन्दर सुन्दर जगहों का भ्रमण किया हूँ वहां भी तुम्हें अपने लिए जो कुछ पसंद आया था उसमें कुछ को मैंने यह कहकर टाल दिया था कि यही सामान पटना में भी मिलता है । फिर क्या लौटने के समय घर पहुँचते पहुँचते कोल्ड वार । कई देशी यात्रा मुझे इसलिए पसंद आया था कि वहां तुम्हें  हरदम बहुत खुश, आनंदित, और मुस्कुराते हुए देखा था। हां ,एक बात जरूर है कि वहां एक बात की कमी अवश्य रह गई कि यात्रा इतनी व्यस्त रही कि तकरार के लिए वक्त ही नहीं मिल पाया ( हा हा हा ) रूठने मनाने की नौबत ही नहीं आई। तुम्हारी खुशी  ने ही तो उस देशी यात्रा को अविस्मरणीय बना दिया है ।


चिल्लाना भी जोर जोर से और हंसना भी गला फाड़ फाड़ कर कि पड़ोसी भी अक्सर अचंभित हो जाते खासकर ठठा कर हँसने में तुम्हारा कोई जोड़ नहीं है और नाही कोई नकल ही कर सकता है ।


   अब यह स्पष्ट हो चुका ही होगा कि 

     " मुझे सिर्फ तुम और तुम ही पसंद हो"

       "तुम्हें सिर्फ मैं और मैं ही पसंद हूँ "


            और तुम्हारी खुशी के लिए मुझे  

एक स्वस्थ जीवन जीना बहुत जरूरी है।


  (परिवार से अगर प्यार है तो अपने को भी सुरक्षित रखिए और दूसरों को भी )

Saturday, May 16, 2020

वैश्विक आर्थिक युध्द या कोविड 19 महामारी

वैश्विक आर्थिक युध्द या  कोविड 19 महामारी

इतिहास में इतना बड़ा व्यापार और वह भी मौत की भयावहता के नाम पर, जब विज्ञान इतना तरक्की कर गया है तब; सचमुच दुनिया में मनुष्य ने पुनः अपने को बन्दर  प्रजाति से मानसिक रुप मे आगे नहीं होना साबित किया है ।

यह सत्य है कि यह एक नया वायरस है जिसका संक्रमण droplets और मनुष्य का शरीर ही है । इसका transmission वुहान, चीन में अक्टूबर 19 से होने का अनुमान है । हद तो तब हो गई कि आज तक अर्थात मई 20 के उत्तरार्द्ध में भी WHO या अमेरिका या इंग्लैंड या अन्य कोई देश इस बीमारी को horror movie की तरह deadly ही बताकर एक सोझी समझी तर्क शक्ति से आर्थिक युद्ध में विश्व को झोंक दिया है । इससे सबसे बुरा असर गरीब देश, असंगठित मज़दूर, किसान, रेहड़ी, ठेला, फुटपाथ, रिक्शा या कार चालक, मज़दूर, विद्यार्थी, बेरोजगार युवक युवती, सेवा से जुड़े लोग जैसे नाई, बढई, मिस्त्री, कुटीर उद्योगआदि - आदि में संलग्न लोग हुए ।

कई उद्योग की कमर ही नहीं उद्योग ही ध्वस्त हो गई वल्कि लाख चाहकर भी उन उजड़े उद्योग को पुनः चालू करना असंभव है । भारत ऐसे देश की कुल जनसंख्या का 98% जनसंख्या या परिवार को नए सिरे से शुरुआत करनी होगी जिसमें आर्थिक नुकसान लोअर आय या मध्यम लोअर आय वर्ग पर आश्रित परिवार होंगें ।

Lockdown या मौत के नाम पर भय का व्यापार हर मनुष्य के मानस पटल पर देने की सुनियोजित साजिश की एक व्यूहरचना की गई । हर इंसान मौत से डरता है जो सत्य है , पर इसके आने का डर सबको मानसिक रुप से रुग्ण कर देता है । प्रश्न यह है कि विश्व इस समय बिना किसी समीक्षा निर्णय के lockdown कर सभी विद्यार्थी, असंगठित मजदूर, कॉन्ट्रैक्ट मज़दूर, कुटीर उद्योग, किसान, गम्भीर या आकस्मिक बीमारी से प्रभावित या रुटीन चेक अप के लिए आवश्यक सेवा को पूरी तरह ठप करने पर आमसहमति या परिचर्चा आवश्यक था या नहीं ।  प्रशासनिक एवम स्वास्थ्य महकमा को कोविड 19 के रोगी के लिए परामर्श जारी कर सभी निजी स्वास्थ्य संस्थानों को भय दिखाकर बन्द करने का क्यों निर्णय लिया गया ।

इस बीमारी से मृत्यु अधिकांश कम इम्युनिटी क्षमता वाले हैं, जैसे औसत आयु 65 से अधिक और पूरी जनसंख्या का अनुमानित अनुपात 0.1 है । अब अगर किसी देश में 65 वर्ष से अधिक उम्र की जनसंख्या अधिक है तब उस देश में मृत्यु दर भी अधिक होगा । अगर किसी देश की जीवन पद्धति में फ़ूड हैविट  ऐसी है कि लोगों का इम्युनिटी लेवल अधिक है या क्षेत्रीय मौसम का प्रभाव इम्युनिटी लेवल का अधिक करना है तब मृत्यु दर कम होगा । इस बीमारी से सबसे अधिक मृत्यु क्रिटिकल रोगी की होती है जैसे , किडनी, दमा, उच्च रक्तचाप, ह्रदय रोग,उच्च ग्लूकोज़ आदि से ग्रसित मनुष्य । क्रिटिकल रोगी या अधिक आयु वाले मनुष्य की मौत दुख का कारण है परन्तु इस नाम पर पूरी आवादी को अनिर्णय और मानसिक रोगी बनाया जाना एक रणनीति का हिस्सा है या समाज की अज्ञानता ।

 कुछ रोगी ऐसे हैं जिन्हें बीमारी का कोई लक्षण नहीं है; पूरी तरह स्वस्थ हैं और समाज में इसका फैलाव कर स्वयं ठीक हो रहे हैं; इस प्रकार के रोगी से सामुदायिक संक्रमण हो रहा है । अंत में 80 % लोगों को प्रभावित कर शरीर में  एन्टी बॉडीज और हेर्ड इम्युनिटी के फैलाव के साथ हमें इस बीमारी के साथ 0.1 % मृत्यु दर के साथ रहना ही होगा ।

भारत में एकमात्र टी बी जैसे रोग से प्रतिवर्ष अनुमानित 5 लाख लोगों की मृत्यु का कारण है । प्रतिवर्ष फ्लू या इन्फ्लूएंजा संक्रमण से प्रतिवर्ष औसत मृत्यु कहीं कोविड से अधिक होने का अनुमान है ।

WHO की गलत एडवाइजरी और भारत द्वारा WHO के एडवाइजरी को आँख मूंद कर मानने का परिणाम इस विविधता पूर्ण देश में lockdown का यह दुष्परिणाम है । कई लोगों का यह भी मत है कि 4 घंटा की मोहलत देकर 140 करोड़ के देश में पूर्णतया lockdown में नागरिकों की दिक्कतों का विश्लेषण बिना ही किया गया  है । जिसका दुष्परिणाम 27, 28 मार्च से ही देश के नागरिक, अप्रवासी मज़दूर द्वारा lockdown में व्यक्तिगत दूरी की अवधारणा को पूरी तरह नकार का दृश्य उजागर हुआ । लगातार 45- 50 दिनों से लाखों करोड़ों मजदूरों की यातायात व्यवस्था ठप करने से 2000 से 2500 किलोमीटर की  दूरी पैदलों आदिम जीवन शैली में भूखे प्यासे,  प्रशासन के डंडों के प्रहार को झेलकर,  पांव में फोलों-छालों के साथ वेवसी में घर आने का दृश्य उजागर होना सरकार की तैयारियों की कमी की तरफ इशारा है । कम से कम नंगे या पैदल या साइकिल से चलनेवाले अप्रवासी मज़दूर को राज्योँ के द्वारा वाहन से राज्यों की सीमा तक यातायात व्यवस्था जारी रखा जाना चाहिए ।

अप्रवासी की सैकड़ों मौतों ने आम मानस के मन मिजाज को कई आनेवाले दुष्परिणामो की बात सोंचने पर मजबूर करता है । मजदूरों के परिवारों को जीविका के लिए अग्रिम एक मुश्त राशि सहायता जिन्दगी बचाने के लिए कारगर सम्भव है । जिसके लिए तैयारी में विलम्ब पुनः लाखो नागरिकों की मौत के रुप में आएगा ।

पूर्व से किसी रोग से ग्रस्त या आकस्मिक बीमार या स्वास्थ्य सहायता का lockdown में किसी निजी अस्पताल या डॉक्टर द्वारा नहीं सेवा देना या यातायात के अभाव या विधिवत पास का निर्गत न होना प्रशासनिक अक्षमता का दुष्परिणाम है ।

Lockdown के स्वरुप में तीन बदलाव के पश्चात भी अगर अप्रवासी मज़दूर या किसी नागरिक की मनुष्य जनित त्रासदो से मौत होना पूरी विश्व मानक नियम और देश से लेकर लोकल प्रशासन की क्षमता और तैयारी के परिदृश्य को उजागर करता है ।

Sunday, May 10, 2020

मातृ दिवस या MOTHER'S DAY

*मातृदिवस कब और क्यों?*

 प्रत्येक प्राणी का अस्तित्व और उसके शरीर का एक- एक कण या रोयां माँ की ही देन है । कोई भी प्राणी अपने पूरे आयु काल में अपने वजूद तक रहने के लिए माँ की देन मात्र है; जिस ऋण से आयुकाल तक कोई जीव उबर नहीं सकता है ।

 एक अमेरिकन महिला *अन्ना जारविश* अपनी पूरी आयु बिना शादी के माँ की सेवा में जीवन अर्पित कर दी, परन्तु जो आया है उसे तो जाना भी तय ही है; अर्थात मृत्यु अटल सत्य है । अपनी माँ की मृत्यु के पश्चात अमेरिकन महिला प्रति वर्ष याद में पुण्यतिथि Mother'sday के रुप में मनाने /याद करने लगी ।

 *अमेरिकन काँग्रेस ने वर्ष 2014 में मई माह के द्वितीय रविवार को मातृदिवस के रुप में मनाए जाने का फैसला लिया । तब से आज तक पूरे विश्व में मई माह के दूसरे रविवार को मातृदिवस मनाया जाने लगा ।*