Sunday, April 19, 2026

पटना बंदरगाह/ स्टीमर सेवा

Sunday musing....


*बच्चा बाबू के स्टीमर* : 👇




*महात्मा गांधी सेतु* के निर्माण के पहले *उत्तर बिहार को राजधानी पटना* से जोड़ने का एकमात्र मार्ग था *जलमार्ग* और इस पर चला करते थे *सोनपुर के रईस बच्चा बाबू के स्टीमर* पहले पहलेजा तक लोग बस और ट्रेन से आया करते थे और *पहलेजा से एलसीटी घाट महेंद्रु घाट और बांस घाट के बीच स्ट्रीमर* चला करते थे इनकी तयशुदा सीमा होती थी और इसके लिए टिकट लेकर लोगों को घंटों इंतजार करना होता था।

*रेलवे स्टीमर* के अलावा *पटना और पहलेजा घाट* के बीच लोगों के लिए *दो और स्टीमर सेवा* चलती थी। *बाँस घाट से बच्चा बाबू की स्टीमर सेवा* भी काफी लोकप्रिय थी। 

*बच्चा बाबू सोनपुर के रईस* थे, जिनकी *निजी कंपनी बाँस घाट से पहलेजा घाट के बीच स्टीमर सेवा* का संचालन करती थी।बड़ी संख्या में लोग इस सेवा से भी आते जाते थे। 


जब लोग राजधानी पटना से सफर करके अपने गाँव पहुँचते तो हालचाल के साथ ये भी पूछते कौन से जहाज से आये तो लोग जवाब देते बच्चा बाबू के जहाज से।


जहाज के इस सफर में इंतजार और सफर में काफी वक्त जाया हो जाता था। इसलिए *पढ़ाकू विद्यार्थी* अपनी किताबें खोल कर जहाज में पढ़ने बैठ जाते थे। समय का सदुपयोग करने के लिए। 


वहीं *पटना के कुर्जी* के पास मैनपुरा से लगी थी *गंगा एलसीटी सर्विस की सेवा*। एलसीटी मतलब *लैंडिग क्राफ्ट टैंक*। 


ऐसी फेरी का इस्तेमाल माल ढुलाई के लिए किया जाता था। तो *गंगा एलसीटी सर्विस पटना और पहलेजा के बीच माल ढुलाई* का महत्वपूर्ण साधन थी। 

इसके *आधार तल पर माल लोड किया जाता था वहीं ऊपरी तल पर लोग सफर* करते थे। *आधार तल पर दो ट्रक, कुछ जीपें, ढेर सारा खाने-पीने का सामान, मोटरसाइकिलें* आदि बुक करके लादी जाती थीं। 


वहीं *एलसीटी सेवा से सोनपुर मेले के समय बड़ी संख्या में हाथी घोड़े और दूसरे जानवर* भी लाद कर इस पार से उस पार लाये जाते थे। 


*गंगा एलसीटी सेवा* एक समय में *पटना में गंगा नदी पर एक बंदरगाह* की तरह हुआ करता था। अब ये सेवा बंद हो चुकी है। पर *पटना के मैनपुरा में एलसीटी घाट* नाम से इलाके का नाम अब भी मशहूर है। जहाज नहीं है, बंदरगाह नहीं पर नाम में उसकी *स्मृतियाँ कायम* है।  


*एलसीटी* के लिए पटना में इस्तेमाल में लाये जाने वाले *जहाज मूल ब्रिटिश रॉयल नेवी* की ओर से विकसित किये गये थे। *दूसरे विश्वयुद्ध* के दौरान इनका कई जगह इस्तेमाल हुआ। 


पहले इनका नाम *टैंक लैंडिग क्राफ्ट* हुआ करता था। बाद में *अमेरिकी नामकरण प्रणाली के मुताबिक इनका नाम एलसीटी (लैंडिंग क्राफ्ट वेसल)* हो गया।


कोई भी जहाज जब अपने मंजिल तक पहुँचने वाला होता था। चाहे पहलेजा की तरफ हो या फिर पटना तरफ। जहाज किनारे लगने से पहले ही बड़ी संख्या में कुली पानी में कूद-कूद कर तेजी से चारों तरफ से जहाज में घुस आते थे। मानो वे जहाज पर हमला करने आये हों। उसके बाद वे अपने ग्राहकों की तलाश में जुट जाते किसे कुली चाहिए। जो हाँ कहता उसके सामान पर कब्जा कर लेते। 


उस जमाने में उत्तर बिहार के लोग बहुत आयत जूट के मील जिसे स्थानीय भाषा में चटकल कहा जाता था में मौसमी नौकरी करने पश्चिम बंगाल जाते थे, तब के जमाने में पश्चिम बंगाल में चटकल मिलों में आसानी से लोगों को काम मिल जाता था। 


भोजपुरिया गीत-संगीत और स्मृतियों में आज भी बंगाल, इसी कारण से लोगों के जेहन में कायम है *भिखारी ठाकुर से लेकर महेंद्र मिश्र* तक लोक गायकों ने बंगाल के इन्हीं कामासूतो को देख कर के अपने गीत *गवनई को जीवंत* किया। बीड़ी पीना, लूंगी पहनना और चाय का आध बंगाल से ही बिहार आया। 


सोनपुर और पटना के बीच में चलने वाले जहाज में भी उस जमाने में टिकट के रेट के हिसाब से व्यवस्था होती थी *वन क्लास और सामान्य क्लास* गाड़ियों को लगने से लेकर समान तक की ढुलाई होती थी। 


एक और साधन था वह *गांधी घाट और रानी घाट के बीच बडहरवा घाट से सोनपुर मेले* के 1 महीने पहले से *बच्चा बाबू का जहाज पटना से गंगा पार कर दियारा* तक ले जाया जाता था। जिसका सदुपयोग कर *सोनपुर मेला जाने वाले यात्री और जानवरों की खरीद और बिक्री के लिए ले जाए जाते थे*।

सेवानिवृत्ति आलेख्य

 ई० नलिन कुमार सिन्हा

तकनीकी प्रवैधिक, अभियंता प्रमुख, ग्रामीण कार्य विभाग 

की सेवा निवृत्ति के शुभ अवसर पर उनके कर-कमलों के अभिनव कुसुम पराग सस्नेह समर्पित


अभिनन्दन-पत्र

मगध साम्राज्य की राजधानी पाटलीपुत्र की पावन धरती के तकनीकी सचिवालय, विश्वेश्वरैया भवन अवस्थित ग्रामीण कार्य बिभाग, पटना से दिनांक 31 जनवरी 2023, मंगलवार के अपराह्न तक 35 वर्ष 7 माह की सेवा करने के पश्चात, सरलचित्त, उदारचरित अपने पद पर आसीन रहते हुए सफलतापूर्वक सेवानिवृत्त हो रहे हैं, यह हमलोगों के लिए गौरवान्वित एवम भावुक क्षण है ।

हमें अपार हर्ष है क्योंकि एक कर्मठ अभियंता के रुप में बिभाग के तकनीकी कार्यों का सम्पादन किये हैं और दूसरी तरफ विषाद इसलिए कि अभिन्न एवम कर्तव्यनिष्ठ अभियंता जिसमें प्रबंधन, प्रशासनिक दूरदर्शिता के साथ साथ मित्रवत व्यबहार रहा है, हमसे दूर जा रहे हैं ।

ग्राम- कल्याण बीघा, नालन्दा निवासी श्री सिन्हा का जन्म 3-01-1963 को पटना जिला में हुआ । मैट्रिक में विशेष स्थान के बाद प्रख्यात सायन्स कॉलेज, पटना से इंटर पास कर BCE पटना (सम्प्रति NIT पटना) से 1986 में B. Sc. Civil Engineering की प्रथम श्रेणी में स्नातक डिग्री के पश्चात BIT सिन्दरी के CIVIL विभाग में अंशकालिक व्याख्याता के पद पर कार्य करने के पश्चात 22 जून 1987 को बिहार अभियंत्रण सेवा अंतर्गत जल संसाधन बिभाग, बिहार सरकार में सहायक अभियंता के पद पर योगदान दिया । जलसंसाधन विभाग अंतर्गत अग्रिम योजना मोकामा टाल परियोजना, गुमानी बराज, बरहेट, साहेबगंज, रुपांकण प्रमंडल, देवघर (झारखंड), सोन नहर आधुनिकीकरण योजना, पूर्वी गंडक नहर का आधुनिकीकरण का सूत्रण, अनुश्रवण, मूल्यांकण से लेकर पालिसी फ्रेमिंग के कार्यों के सम्पादन के बाद 22 जुलाई 2008 से 30 जून 2013 तक ग्रामीण कार्य विभाग में पथों , पुलों का निर्माण एवम मुख्यालय स्तर पर क्षमता संवर्द्धन कार्य  करने के बाद कार्यपालक अभियंता के रुप में कार्य प्रमंडल कटिहार अंतर्गत निर्माण एवम अनुरक्षण के दायित्वों का दक्षतातापूर्वक निर्वहन किया है । 22 जून 2016 से मुख्यालय स्तर पर नाबार्ड नोडल एवम राज्यस्तरीय महत्वाकांक्षी MMGSY परियोजना के नोडल के पद पर आसीन रहकर राज्य के सभी कोरनेटवर्क योजनाओं की स्वीकृति एवम कार्यो का कुशल अनुश्रवण किया है । आपने वाह्य ऋण सम्पोषित विश्व बैंक और NDB योजनाओं के परियोजना निदेशक के रुप में भारत सरकार और ऋण संस्थानों के साथ सफल अनुश्रवण का कार्य किया है । वर्ष 2019 से अधीक्षण अभियंता के रुप में गुणवत्ता प्रबन्धन कोषांग एवं अभियंता प्रमुख के प्रावैधिक सचिव के साथ साथ पूर्ववत MMGSY कोषांग के कार्यो के दायित्वों का दक्षता एवम कुशलता के साथ 31 जनवरी 23 तक सम्पादित किया है । सेवा काल में आपने बर्मिंघम विश्वविद्यालय, इंग्लैंड में साप्ताहिक, वाल्मी में त्रैमासिक  IIM लुखनऊ में पाक्षिक, IIM अहमदाबाद, CSIR ओखला, IHAE नोएडा में पाक्षिक एवम अन्य प्रतिष्ठानों में विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण प्राप्त किया है । आपकी दक्षता, प्रशासनिक क्षमता एवम MMGSY में पथों एवम पुलों के निर्माण में योगदान के कारण 27-05-2018 को राज्यस्तरीय कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री, बिहार सरकार, आदरणीय नीतीश कुमार द्वारा पुरस्कार प्रदान किया गया है । 

इस लंबे सेवाकाल में विभन्न विभागों के भिन्न भिन्न स्तर के पदों पर आसीन रहकर आपने उत्तरदायित्वपूर्ण एवम कुशलता से कार्यो का निष्पादन किया है जिसमें MMGSY का कार्यकाल सदैव स्वर्णिम काल के रुप में याद किया जाएगा । अधिकारियों एवम कर्मचारियों के मध्य आप एक कड़क पदाधिकारी एवम विभाग की समस्याओं के त्वरित निवारण में अग्रणी भूमिका अदा की है । आप आस-पास रहकर तो सदैव मार्ग दर्शन करते रहे हीं हैं , आशा एवम पूर्ण आस्था है कि आप दूर रहकर भी हमारे रहेगें ।

विदाई की इस कठिन वेला में हम आपके क्रियमान शक्तियों का गुणानुवाद करने में असमर्थ हो रहे हैं । अतः यदि किसी मोड़ पर हम पदाधिकारी- कर्मचारी से किसी प्रकार की भूल हुई हो जिससे आप आहत हुए हों तो इसके लिए हम सभी क्षमा प्रार्थी हैं ।

पदाधिकारीगण एवम कर्मचारीगण की हार्दिक कामना है कि आप जहाँ भी, जिस क्षेत्र या परिवेश में पदार्पण करे -वह फलदायी हो- मंगलकारी हो ।

हम हैं:-

आपके स्नेहाभिशिक्त पदाधिकारी एवम कर्मचारीगण ग्रामीण कार्य बिभाग, बिहार पटना ।

Wednesday, May 28, 2025

चार धाम

चारधाम यात्रा वृत्तांत


मैं और मेरे बहनोई सपत्नीक दोनों देहरादून अपने बड़े साढू डीआरडीओ से सेवानिवृत  के साथ १८ मई को प्रातः ८ बजे मसूरी के रास्ते कैंप्टी फ़ाल होते बाराकोट के समीप कैम्प नंदगांव के yaantra रिसोर्ट में पहुँचे (कुल दूरी - २०० कि मी)। रास्ते में पांडवों के लाखा गृह के दर्शन भी श्रद्धालु करते हैं ।प्रातः स्नान के पश्चात ४ बजे हनुमानचट्टी, जानकी चट्टी होते हुए १९ मई को ७ किलोमीटर संकरे पहाड़ों के मार्ग से होकर गर्म कुंड (सूर्य कुंड), दिव्य शिला पूजन के बाद सूर्य पुत्री यमराज और शनि देव की बहन यमुना जी के उद्गम स्थल यमुनोत्री का दर्शन के पश्चात पुनः शाम ६ बजे तक निर्वाणा रिसोर्ट पहुँचे । गर्म कुंड का प्रसाद कच्चा चावल को पोटली में डालकर भात की मान्यता है ।यमुनोत्री चढ़ाई कष्टकर है जिसका तापमान दिन में भी ४डिग्री था पर जानकी चट्टी का तापमान १८ डिग्री सेल्सियस था । चढ़ाई के लिए श्रद्धालु पिट्ठू, घोड़ा, डोली या पैदल एकमात्र उपाय है ।

२० मई को उत्तरकाशी में प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर दर्शन (दूरी-१२५KM) के पश्चात भागीरथी नदी के तट पर आरती स्थल के समीप साक्षी रिसोर्ट में विश्राम किया । यह स्थल नौका विहार के लिए भी प्रसिद्ध है । २१ मई प्रातः ५ बजे नित्य कर्म से निवृत होकर हरसिल के रास्ते हिमालय के खूबसूरत घाटियों से होकर गनगनी hot spring वाटर स्नान के पश्चात गंगोत्री में भागीरथ के आह्वान स्थल पर गंगोत्री में स्नान दर्शन पूजा के पश्चात शाम ७ बजे  भागीरथी नदी के तट पर साक्षी में विश्राम किया ।(दूरी-up _ down २००KM)

२२ मई २००KM भ्रमण उत्तरकाशी से प्रारंभ कर बूढ़ा केदार, रुद्र प्रयाग के रास्ते गुप्त काशी के कैम्प निर्वाणा रिसोर्ट में रात्रि विश्राम किया । यहाँ पंच केदार की मान्यता है , जिसमें बूढ़ा केदार में पशु के वेश में रहने के कारण पांडवों ने पहचान नहीं कर पाया । गुप्त काशी से सोन प्रयाग और गौरी कुंड स्नान के पश्चात १६ किलोमीटर के ट्रेक पर केदारनाथ जी मंदाकिनी नदी के उद्गम स्थल पर है ।

23 May मैंने प्रातः काली मठ में देवी दर्शन के पश्चात केदार नाथ के लिए प्रस्थान किया ।मैंने फाँटा से हेलीकॉप्टर [जो बरसात या मौसम के अनुसार स्थगित भी हो जाता है ।] से केदार पहुँच कर केदारनाथ जी, भैरव, भीम शिला, शंकराचार्य समाधि स्थल का दर्शन रात्रि में २4 मई को प्रातः २ बजे विशेष पूजा अर्चना कर (रात भर बारिश के कारण अधिक ठंढ की अनुभूति -१degree एक डोरमेटरी होटल में ठहरा था ) ४ घंटे की प्रतीक्षा के पश्चात २४ मई को हेलीकॉप्टर से फाँटा के रास्ते गुप्त काशी के रिसोर्ट लौटकर रात्रि विश्राम किया । केदारनाथ जी के स्थल का विवरण पंक्ति में लिपिबद्ध करना संभव नहीं है ।

२५ मई को गुप्तकाशी में अर्द्धनारेश्वर मन्दिर दर्शन और शारदीय केदारनाथ जी के ऊखीमठ स्थल में पूजा अर्चना के पश्चात चोपता वैली (Mini Switzerland)के अति प्राकृतिक मनोहारी दृश्य के पश्चात हिरण्यकश्यपु मंदिर के दर्शन के पश्चात जोशीमठ के रास्ते बद्रीनाथ के Amrita the Awadh में रात्रि विश्राम किया ।

२६ मई प्रातः ३ बजे स्नान कर बद्री नाथ जी के प्रातः आरती और गर्म कुंड के मार्ग से बद्रीनाथ जी का दर्शन पूजन हवन कर होटल में ६ बजे पहुँचा । बद्री नाथ अलकनंदा नदी पर अवस्थित है । भारत चीन बॉर्डर पर अंतिम गांव माना सरस्वती और अलकनंदा के संगम पर अवस्थित है । माना ग्राम में चाय का भारत में सबसे प्रथमबार उपयोग में लाया गया था । २KM ट्रेक पर गणेश मंदिर, व्यास गुफा दर्शन, भीम पुल, सरस्वती नदी का उद्गम स्थल, स्वर्ग द्वार जिससे पांडवों में हिमालय शृंखला से भैरव की पूंछ आसरे स्वर्ग प्रस्थान स्थल का भ्रमणोप्रांत Auli वैली होकर जोशीमठ - विष्णु प्रयाग के रास्ते कर्ण प्रयाग नंद प्रयाग होते हुए रुद्र प्रयाग मोनल रिसोर्ट में रात्रि ९ बजे पहुँचा ।Aulli वैली अति मनोहारी है ।( २००KM)

२७ मई को रास्ते में अलकनंदा नदी में शक्ति माता धारी देवी और देव प्रयाग भागीरथी और अलकनंदा के संगम के पश्चात गंगा नदी का दर्शनकर देवभूमि दर्शनोपरांत ऋषिकेश भ्रमणोपरांत मैं देहरादून रात ८ बजे यात्रा समाप्त किया ।(१६०KM)

*नोट:- बद्री नाथ और गंगोत्री में कोई ट्रेक नहीं है पर मौसम किसी क्षण परिवर्तन हो सकता है । दिन का तापमान मई में ९ डिग्री सेल्सियस था पैट रात्रि में तापमान २ डिग्री तक पहुँच जाता है ।

केदारनाथ और यमुनोत्री सड़क मार्ग पर अवस्थित नहीं है जिसके लिए आपको ट्रेक करना होगा तापमान कमोबेश रात में २ डिग्री - दिन में ९ डिग्री के क़रीब था ।

मौसम की भविष्यवाणी करना बहुत ही कठिन है ।

गर्म क्लॉथ inner, जैकेट, रेनकोट, छाता, knee cap, दस्ताना, ट्रेक shoes, आवश्यक दवा या पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलिंडर आवश्यकतानुसार जरूरी है ।

Thursday, January 16, 2025

हिन्दी महीना के अनुसार वर्जित खाने की बस्तु

*भारतीय जलवायु में स्वास्थ्य के प्रकृति के अचूक नियम*


○चैते गुङ ○बैशाखे तेल, ○जेठे पंथ ○असाढै बेल ।

○सावन साग ○भादो दही , ○क्वार करेला ○कातिक मही,

○अगहन जीरा ○पुष धनिया, ○माघे मिसरी ○फागुण चना ।।।

○ ईं बारह से देह बचाय तो घर वैद्य कबहूँ ना आय ।।

                                       (ग्रामीण कहावत)


      ●हिन्दी भावार्थ 


   *बारह महीनों में अलग अलग वो ऐसी चीजें जिनका हम परहेज करके निरोगी रह सकते हैं।*


 *१) चैत  - गुङ नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इस महीने का नया गुङ पथ्य नहीं होता।*


 *२) वैशाख  - तेल नहीं खायें क्योंकि वैशाख में जो पसीना निकलता हैं उन छिद्रों को तेल अवरूद्ध कर देती हैं।*


 *३) ज्येष्ठ  - पंथ यानी पथ - रास्ता पर पैदल नहीं चलना चाहिए क्योंकि इस महिने गर्मी बहुत ज्यादा होने से शरीर डिहाइड्रेशन  में आ जायेगा।*


 *४) आसाढ - बेल फल बहुत गुणकारी होकर भी आसाढ में खाने योग्य नहीं होता।*


 *५) श्रावण  - सावण में पत्ते वाले आहार न लें क्योंकि इस मास में बरसात के समय पृथ्वी गर्भीणी होकर अदृश्य असंख्य जीव पैदा करती हैं जिनके अंडज पत्तों पर भी होते हैं।*


 *६) भादो - इस महिने में दही के जो पथ्य बैक्टीरिया होते हैं वो ह्युमिडिटी के चलते जल्दी जल्दी बढ़कर खतरनाक हो जाते हैं।*


 *७) आसीन- करेला आसीन में पकाकर खाने योग्य नहीं रहता। करेला पितकारक होता हैं।*


 *८) कार्तिक  - कार्तिक में मही यानी मट्ठा ना खायें क्योंकि कार्तिक से हमें ठंडा नहीं गरम आहार शुरू कर देना चाहिए।*


 *९) अगहन - जीरा ना खायें क्योंकि जीरा प्रकृतिगत ठंडा होता हैं। जबकि अगहन में ठंड ही होती हैं।*


 *१०) पौष - पौष में धनिया ना खायें क्योंकि धनिये की प्रकृति ठंडी होती हैं। सर्दियों के इन दिनों में गर्म प्रकृतिगत व्यंजन खाना चाहिए ।गर्मियों में सिर्फ धनिये के लड्डू बनाकर खावें।*


 *११) माघ - माघ में मिश्री ना खायें । मिश्री की तासीर भी ठंडी होती हैं जो गरम ऋतू में धनिये के लड्डुओं के साथ खावें हैं।*


 *१२) फाल्गुन- फाल्गुन में चना ना खावें । एकदम नया चना गैस कारक होता हैं। फाल्गुन में वायुमंडल में भी इधर-उधर की बिना ठिकाने की हवा चलती रहती हैं। मौसम भी कभी कैसा तो कभी कैसा रहता हैं। चना वैसे भी गैस कारक होता है ।*

  

*इस प्रकार अगर आप अपथ्य का पालन करेंगे तो शरीर को जरूर सुरक्षित रख पायेंगे।*

Monday, December 23, 2024

क्या खाना सेहतमंद?

*कहते है कि अति हर चीज की बुरी होती है।*


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*कोइ भी खाना अधिक न खाए ।अपने पेट से थोड़ा कम ही खाए।*

*ज्यादा खाना खाने से acidity  और gas`की समस्या हो जाती है।*


*सुबह के समय `दूध के साथ नाश्ता  करे, दोपहर को 12:00 से 2:00  बजे  के बीच खाना खाए, फिर  रात के समय 07:00 बजे तक खाना खा लेना चाहिए।*


*(ध्यान रहे खाने मे नाश्ते मे सलाद अधिक होना चाहिए)*


*कभी कभी कुछ चीजें बहुत मनपसंद होने के कारण हम बहुत ज्यादा खा लेते हैं, अगर आपने ज्यादा खा ली हैं तो कैसे पचायें--*


1- *केले की अधिकता में दो छोटी इलायची खा लीजिये।*


2- *आम पचाने के लिए आधा चम्म्च सोंठ का चूर्ण और गुड फाक ले।*


3- *जामुन ज्यादा खा लिया तो 3-4 चुटकी नमक खा ले।*


4- *सेब ज्यादा हो जाए तो दालचीनी का चूर्ण एक ग्राम खा ले।*


5- *खरबूज के लिए आधा कप चीनी का शरबत*


6- *तरबूज के लिए सिर्फ एक लौंग*


7- *अमरूद के लिए सौंफ*


8- *नींबू के लिए नमक*


9- *बेर के लिए सिरका*


10- *गन्ना ज्यादा चूस लिया हो तो 4-5 बेर खा लीजिये*


11- *चावल ज्यादा खा लिया है तो आधा चम्म्च अजवाइन पानी से निगल लीजिये*


12- *बैगन के लिए सरसो का तेल एक चम्म्च*


13- *मूली ज्यादा खा ली हो तो एक चम्म्च काला तिल चबा लीजिये*


14- *बेसन ज्यादा खाया हो तो मूली के पत्ते चबाएं*


15- *खाना ज्यादा खा लिया है तो थोड़ी दही खाइये*


16- *मटर ज्यादा खाई हो तो अदरक चबाएं*


17- *इमली या उड़द की दाल या मूंगफली या शकरकंद या जिमीकंद ज्यादा खा लीजिये तो फिर गुड खाइये।*


18- *मुंग या चने की दाल ज्यादा खाये हों तो एक चम्म्च सिरका पी लीजिये*


19- *मकई ज्यादा खा गये हो तो मट्ठा पीजिये*


20- *घी या खीर ज्यादा खा गये हों तो काली मिर्च चबाएं*


21- *खुमानी ज्यादा हो जाए तो ठंडा पानी पीयें*


22- *पूरी कचौड़ी ज्यादा हो जाए तो गर्म पानी पीजिय*


*अगर सम्भव हो तो भोजन के साथ एक/आधे नींबू का रस एक कप गुन गुने पानी में मिला कर पीजिये या भोजन में निचोड़ लीजिये , खाया पिया सब पच भी जाएगा और 8०% बीमारियों से भी बचे रहेंगे।*


(ज्यादे खाने से बचे)

Sunday, March 24, 2024

भारत की विकास का रोड़ा

 आज ७७ वर्ष बीत गए भारत का निर्माण हुए पर उसी समय चीन और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद असहाय जापान की तुलना में आज भी देश प्रगति का बाट जोह रहा है।

आज भारत का स्कील्ड, टेक्नोक्रेट, scientist, डॉक्टर आईटी पर्सनल और उच्च शिक्षा हेतु छात्र विदेश में पलायन को मजबूर हैं।यदि आपको भारत की स्थिति समझनी है तो कभी फुर्सत में समय निकालकर  इस प्लेटफार्म के सभी लोग जो अपने को शिक्षित या मध्यम वर्गीय कहते हैं वह सोंचे कि आप अपने बच्चे की शिक्षा सरकारी स्कूल में कराते हैं । हम में से कितने व्यक्ति निजी स्कूल से शिक्षा प्राप्त की है ? अब जब हमारी सरकारी स्कूल और सरकारी नौकरी प्राप्त हो गई तब क्या हमारे गाँव के लोग जो अधिकांश ग़रीब हैं वह सक्षम हैं कि वह निजी स्कूल में फ़ीस देकर शिक्षा के भारी भरकम राशि का वहन कर सके ।

हम जब व्यक्तिगत रूप में तुलनात्मक आर्थिक रुप से संपन्न हो गये तब देश प्रेम जाग गया । अगर सचमुच में देश प्रेम जाग जाता तो कितने अशिक्षित अपने ग्रामीण या घरेलू सेवक या अपने समाज के लोगों को हम शिक्षित कर पाये ।यही नहीं अलबत्ता हमलोगों ने स्वास्थ्य, शिक्षा और रोज़गार में अपने बच्चों को पिछड़ते देखकर हम में से कई ने निजीकरण की नींव के रूप में उच्च पैसे से बच्चों को शिक्षित करने के लिए निजी शिक्षण संस्थानों का ईजाद किया । इससे double फ़ायदा बिज़नस का और पैसों या सामंतबाद के पोषक के बच्चों के प्रतियोगिता में पिछड़ने पर कैपिटेशन फ़ीस और उच्च शिक्षा का नया दरवाज़ा खोलना । फिर जब अक्षम धनाढ्य के बच्चे पढ़ जायें और फिर सरकारी नौकरी में पिछड़ने लगे तो नौकरी के स्थान पर सरकारी पदों में कटौती के साथ निजीकरण कन्सल्टेंसी और सरकारी कार्यों को निजीकरण के हाथों में सौंपने का सुनियोजित व्यापार जिसका संचालन फिर वही अक्षम निजी क्षेत्रों से उच्च शिक्षा प्राप्त किए धनाढ्य के बच्चे CEO के रूप में व्यापार का मॉडल शुरू किया । इस व्यवस्था ने सभी मध्यम वर्गीय, ग़रीब किसान, मज़दूर के लिए शिक्षा और रोज़गार को सरकारी स्कूल की बदतर होती हालात ने ग़रीब से दरिद्र होने पर मजबूर करने लगा । यही नहीं किसान की घटती औसत समानुपातिक आमदनी और सरकारी सेवा में बेरोज़गारी ने लोगों को जीविकोपार्जन के लिए ही तड़फड़ाते रहना पड रहा है ।


हमलोग की देश सेवा  और देश प्रेम इतना मज़बूत है कि जब अपने बच्चों को भारत के निजी या सरकारी संस्थानों में शिक्षा या रोज़गार का योग्यता के अनुसार मासिक आमदनी नहीं मिलने पर बच्चों को GRE, TOFEL से वैदेशिक संस्थानों में शिक्षा प्राप्त कर विदेश या MNC में नौकरी के लिए प्रोत्साहित करने में लगे हैं। यह हम मध्यम वर्गीय व्यक्ति की एक प्रकार की मजबूरी भी सरकारी नौकरी या निजीकरण में योग्यता के अनुसार रोज़गार न मिलने पर बन गई है ।


अब प्रश्न है उद्योग का ? टाटा और बिरला समूह के उद्योग घराने को छोड़कर अधिकांश उद्योगपति के द्वारा देश के प्रकृति प्रदत्त पदार्थ, खनिज, समुद्र, पत्थर,  खाद्य सामग्री , कृषि उत्पादों का दोहन कर रोज़गार में लगे व्यक्ति की मजबूरी का शोषण कर उत्पाद का  मूल्य अधिक मुनाफ़ा पर व्यवसाय कर दिन दूना दूना तरक़्क़ी कर रहा है पर देश या पिछड़ेपन के लिए कोई भी सार्थक प्रयास नहीं की गई है या की जा रही है ।


*अब तो स्वास्थ्य चिकित्सा, जाँच और दवा भी कॉरपोरेट की गिरफ़्त में अपने जीवन को सौंप कर तमाशबीन बन कर मारने का इंतज़ार करने पर मजबूर होना एक मात्र मार्ग बच गया है ।*


*Public system का निजीकरण एक नये प्रकार की ग़ुलामी को जन्म देता है । निजी संस्थान या उद्योग तभी देश हित में रहेगा जब तक उसकी प्रतियोगिता सरकारी सक्षम संस्थान या अन्य निजी संस्थान की भी मौजूदगी होगी ।*

Monday, November 27, 2023

कार्तिक पूर्णिमा२०२३ का गंगा दर्शन और आस्था

 *कार्तिक पूर्णिमा २०२३ का गंगा स्नान का यथार्थ*


*आज संयोग से मैंने कार्तिक पूर्णिमा के दिन पटना से बख़्तियारपुर सुबह ६ बजे गंगा दर्शन के लिए सपत्नीक , बहन संग अतीत मंजर हेतु स्नान आदि से निवृत्त होकर ७ बजे गंगा घाट पहुँचने के बाद घाट भ्रमण एवम दर्शन कर पुनः छठ का ठेकुआ चाय लिट्टी खाने के बाद पटना लौटकर गाय घाट से दीघा घाट तक कई घाटों के गंगा दर्शन के पश्चात दोपहर बाद अटल पथ से पटना निवास पहुँचा ।*


*बचपन के गंगा दर्शन से यह दर्शन मुझे कौतुहल किया ।*


*१९७० के समय में गंगा स्नान में किसानों की ही बाहुल्यता होती थी । घाट पर खिलौने, बांसुरी, औरतों के शृंगार प्रसाधन की वस्तु, लट्ठो, तिलकतरी, दही, गुड, सत्तू, चुरा बिकता था । ढोल, मंदार के साथ औघाड़ का तांडव भय पैदा करता था । गंगा में कल कल ध्वनि के साथ जल प्रवाहित होता था । मंदिर में आने जाने का ताँता लगा रहता था । मुंडन कार्यक्रम के साथ ओझा, भगत का खेल अचंभित करता था ।वैसे मैं स्पष्ट कर दूँ कि बचपन के तीन वर्ष माता पिता और तीन बहनों के साथ मैंने अपने बख़्तियारपुर अवस्थित घर में समय बिताया था ।*


*इस वर्ष के गंगा दर्शन में सिर्फ़ कामगार मज़दूर वह भी पहले की तुलना में बहुत ही कम देखने को मिला । घाट पर दही, गुड, चूड़ा बिकते नहीं देखा और शृंगार प्रसाधन और साँख, लट्ठों, तिलकतरी के इक्का दुक्का ठेले को देखा वहाँ भी बिक्री न के बराबर । गंगा का पानी गंदा रंग के साथ ठहराव लिए था जो चीख चीख़ कर प्रकृति के विलुप्त होने की व्यथा बतला रहा था । सबसे विचित्र बात अल्प भीड़, इक्का दुक्का मुंडन मंजर के साथ कोई ओझा भगत का डांस तांडव का मंजर नहीं था । इस अंधविश्वास का स्वतः विलुप्त होना ग़रीबों में जागरुकता का अहसास करा रहा था जबकि सम्भ्रांत की ऊँगली में रत्न जड़ित अंगूठी भारत के विषैले नाग की सज्जा को सुशोभित कर रहा है ।मंदिर में आंशिक भीड़ कार्तिक पूर्णिमा या गंगा स्नान में ख़त्म होती आस्था का पहचान है या प्रदूषित गंगा का होना । अगर गंगा का प्रदूषण कारण होता तब छठ पर्व में गंगा घाट में भीड़ क्यों बढ़ते जाती! हिंदू के सोशल मिडिया पर ध्वजवाहक का गंगा स्नान में सर्वथा अभाव था । था तो सिर्फ़ गंदे पुराने कपड़े पहने मोटरी गठ्ठर के साथ आये आंशिक BPL सूची वाले लोग ।*


*आज कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान में मेरे जैसे और हिन्दू धर्म के क्षदम सोशल मीडिया के संभ्रांत सिर्फ़ राजनीतिक लवादा ओढ़े अपनी पत्नी पुत्र के साथ गाढ़ी निद्रा में लोगों को जाति धर्म के नाम पर आपस में लड़ाने में लगे थे और वास्तविकता से कोसों दूर रहकर सही सनातन वाहक के शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार से वंचित रखकर पीज़ा, बर्गर, केक, पेस्ट्री, मटन, चिकन, मछली, प्रोन, क्रैब की तैयारी में ऑनलाइन ऑर्डर के लिए मोबाईल से नूरा कुश्ती कर रहे थे ।*