Sunday, April 19, 2026

पटना बंदरगाह/ स्टीमर सेवा

Sunday musing....


*बच्चा बाबू के स्टीमर* : 👇




*महात्मा गांधी सेतु* के निर्माण के पहले *उत्तर बिहार को राजधानी पटना* से जोड़ने का एकमात्र मार्ग था *जलमार्ग* और इस पर चला करते थे *सोनपुर के रईस बच्चा बाबू के स्टीमर* पहले पहलेजा तक लोग बस और ट्रेन से आया करते थे और *पहलेजा से एलसीटी घाट महेंद्रु घाट और बांस घाट के बीच स्ट्रीमर* चला करते थे इनकी तयशुदा सीमा होती थी और इसके लिए टिकट लेकर लोगों को घंटों इंतजार करना होता था।

*रेलवे स्टीमर* के अलावा *पटना और पहलेजा घाट* के बीच लोगों के लिए *दो और स्टीमर सेवा* चलती थी। *बाँस घाट से बच्चा बाबू की स्टीमर सेवा* भी काफी लोकप्रिय थी। 

*बच्चा बाबू सोनपुर के रईस* थे, जिनकी *निजी कंपनी बाँस घाट से पहलेजा घाट के बीच स्टीमर सेवा* का संचालन करती थी।बड़ी संख्या में लोग इस सेवा से भी आते जाते थे। 


जब लोग राजधानी पटना से सफर करके अपने गाँव पहुँचते तो हालचाल के साथ ये भी पूछते कौन से जहाज से आये तो लोग जवाब देते बच्चा बाबू के जहाज से।


जहाज के इस सफर में इंतजार और सफर में काफी वक्त जाया हो जाता था। इसलिए *पढ़ाकू विद्यार्थी* अपनी किताबें खोल कर जहाज में पढ़ने बैठ जाते थे। समय का सदुपयोग करने के लिए। 


वहीं *पटना के कुर्जी* के पास मैनपुरा से लगी थी *गंगा एलसीटी सर्विस की सेवा*। एलसीटी मतलब *लैंडिग क्राफ्ट टैंक*। 


ऐसी फेरी का इस्तेमाल माल ढुलाई के लिए किया जाता था। तो *गंगा एलसीटी सर्विस पटना और पहलेजा के बीच माल ढुलाई* का महत्वपूर्ण साधन थी। 

इसके *आधार तल पर माल लोड किया जाता था वहीं ऊपरी तल पर लोग सफर* करते थे। *आधार तल पर दो ट्रक, कुछ जीपें, ढेर सारा खाने-पीने का सामान, मोटरसाइकिलें* आदि बुक करके लादी जाती थीं। 


वहीं *एलसीटी सेवा से सोनपुर मेले के समय बड़ी संख्या में हाथी घोड़े और दूसरे जानवर* भी लाद कर इस पार से उस पार लाये जाते थे। 


*गंगा एलसीटी सेवा* एक समय में *पटना में गंगा नदी पर एक बंदरगाह* की तरह हुआ करता था। अब ये सेवा बंद हो चुकी है। पर *पटना के मैनपुरा में एलसीटी घाट* नाम से इलाके का नाम अब भी मशहूर है। जहाज नहीं है, बंदरगाह नहीं पर नाम में उसकी *स्मृतियाँ कायम* है।  


*एलसीटी* के लिए पटना में इस्तेमाल में लाये जाने वाले *जहाज मूल ब्रिटिश रॉयल नेवी* की ओर से विकसित किये गये थे। *दूसरे विश्वयुद्ध* के दौरान इनका कई जगह इस्तेमाल हुआ। 


पहले इनका नाम *टैंक लैंडिग क्राफ्ट* हुआ करता था। बाद में *अमेरिकी नामकरण प्रणाली के मुताबिक इनका नाम एलसीटी (लैंडिंग क्राफ्ट वेसल)* हो गया।


कोई भी जहाज जब अपने मंजिल तक पहुँचने वाला होता था। चाहे पहलेजा की तरफ हो या फिर पटना तरफ। जहाज किनारे लगने से पहले ही बड़ी संख्या में कुली पानी में कूद-कूद कर तेजी से चारों तरफ से जहाज में घुस आते थे। मानो वे जहाज पर हमला करने आये हों। उसके बाद वे अपने ग्राहकों की तलाश में जुट जाते किसे कुली चाहिए। जो हाँ कहता उसके सामान पर कब्जा कर लेते। 


उस जमाने में उत्तर बिहार के लोग बहुत आयत जूट के मील जिसे स्थानीय भाषा में चटकल कहा जाता था में मौसमी नौकरी करने पश्चिम बंगाल जाते थे, तब के जमाने में पश्चिम बंगाल में चटकल मिलों में आसानी से लोगों को काम मिल जाता था। 


भोजपुरिया गीत-संगीत और स्मृतियों में आज भी बंगाल, इसी कारण से लोगों के जेहन में कायम है *भिखारी ठाकुर से लेकर महेंद्र मिश्र* तक लोक गायकों ने बंगाल के इन्हीं कामासूतो को देख कर के अपने गीत *गवनई को जीवंत* किया। बीड़ी पीना, लूंगी पहनना और चाय का आध बंगाल से ही बिहार आया। 


सोनपुर और पटना के बीच में चलने वाले जहाज में भी उस जमाने में टिकट के रेट के हिसाब से व्यवस्था होती थी *वन क्लास और सामान्य क्लास* गाड़ियों को लगने से लेकर समान तक की ढुलाई होती थी। 


एक और साधन था वह *गांधी घाट और रानी घाट के बीच बडहरवा घाट से सोनपुर मेले* के 1 महीने पहले से *बच्चा बाबू का जहाज पटना से गंगा पार कर दियारा* तक ले जाया जाता था। जिसका सदुपयोग कर *सोनपुर मेला जाने वाले यात्री और जानवरों की खरीद और बिक्री के लिए ले जाए जाते थे*।

सेवानिवृत्ति आलेख्य

 ई० नलिन कुमार सिन्हा

तकनीकी प्रवैधिक, अभियंता प्रमुख, ग्रामीण कार्य विभाग 

की सेवा निवृत्ति के शुभ अवसर पर उनके कर-कमलों के अभिनव कुसुम पराग सस्नेह समर्पित


अभिनन्दन-पत्र

मगध साम्राज्य की राजधानी पाटलीपुत्र की पावन धरती के तकनीकी सचिवालय, विश्वेश्वरैया भवन अवस्थित ग्रामीण कार्य बिभाग, पटना से दिनांक 31 जनवरी 2023, मंगलवार के अपराह्न तक 35 वर्ष 7 माह की सेवा करने के पश्चात, सरलचित्त, उदारचरित अपने पद पर आसीन रहते हुए सफलतापूर्वक सेवानिवृत्त हो रहे हैं, यह हमलोगों के लिए गौरवान्वित एवम भावुक क्षण है ।

हमें अपार हर्ष है क्योंकि एक कर्मठ अभियंता के रुप में बिभाग के तकनीकी कार्यों का सम्पादन किये हैं और दूसरी तरफ विषाद इसलिए कि अभिन्न एवम कर्तव्यनिष्ठ अभियंता जिसमें प्रबंधन, प्रशासनिक दूरदर्शिता के साथ साथ मित्रवत व्यबहार रहा है, हमसे दूर जा रहे हैं ।

ग्राम- कल्याण बीघा, नालन्दा निवासी श्री सिन्हा का जन्म 3-01-1963 को पटना जिला में हुआ । मैट्रिक में विशेष स्थान के बाद प्रख्यात सायन्स कॉलेज, पटना से इंटर पास कर BCE पटना (सम्प्रति NIT पटना) से 1986 में B. Sc. Civil Engineering की प्रथम श्रेणी में स्नातक डिग्री के पश्चात BIT सिन्दरी के CIVIL विभाग में अंशकालिक व्याख्याता के पद पर कार्य करने के पश्चात 22 जून 1987 को बिहार अभियंत्रण सेवा अंतर्गत जल संसाधन बिभाग, बिहार सरकार में सहायक अभियंता के पद पर योगदान दिया । जलसंसाधन विभाग अंतर्गत अग्रिम योजना मोकामा टाल परियोजना, गुमानी बराज, बरहेट, साहेबगंज, रुपांकण प्रमंडल, देवघर (झारखंड), सोन नहर आधुनिकीकरण योजना, पूर्वी गंडक नहर का आधुनिकीकरण का सूत्रण, अनुश्रवण, मूल्यांकण से लेकर पालिसी फ्रेमिंग के कार्यों के सम्पादन के बाद 22 जुलाई 2008 से 30 जून 2013 तक ग्रामीण कार्य विभाग में पथों , पुलों का निर्माण एवम मुख्यालय स्तर पर क्षमता संवर्द्धन कार्य  करने के बाद कार्यपालक अभियंता के रुप में कार्य प्रमंडल कटिहार अंतर्गत निर्माण एवम अनुरक्षण के दायित्वों का दक्षतातापूर्वक निर्वहन किया है । 22 जून 2016 से मुख्यालय स्तर पर नाबार्ड नोडल एवम राज्यस्तरीय महत्वाकांक्षी MMGSY परियोजना के नोडल के पद पर आसीन रहकर राज्य के सभी कोरनेटवर्क योजनाओं की स्वीकृति एवम कार्यो का कुशल अनुश्रवण किया है । आपने वाह्य ऋण सम्पोषित विश्व बैंक और NDB योजनाओं के परियोजना निदेशक के रुप में भारत सरकार और ऋण संस्थानों के साथ सफल अनुश्रवण का कार्य किया है । वर्ष 2019 से अधीक्षण अभियंता के रुप में गुणवत्ता प्रबन्धन कोषांग एवं अभियंता प्रमुख के प्रावैधिक सचिव के साथ साथ पूर्ववत MMGSY कोषांग के कार्यो के दायित्वों का दक्षता एवम कुशलता के साथ 31 जनवरी 23 तक सम्पादित किया है । सेवा काल में आपने बर्मिंघम विश्वविद्यालय, इंग्लैंड में साप्ताहिक, वाल्मी में त्रैमासिक  IIM लुखनऊ में पाक्षिक, IIM अहमदाबाद, CSIR ओखला, IHAE नोएडा में पाक्षिक एवम अन्य प्रतिष्ठानों में विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण प्राप्त किया है । आपकी दक्षता, प्रशासनिक क्षमता एवम MMGSY में पथों एवम पुलों के निर्माण में योगदान के कारण 27-05-2018 को राज्यस्तरीय कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री, बिहार सरकार, आदरणीय नीतीश कुमार द्वारा पुरस्कार प्रदान किया गया है । 

इस लंबे सेवाकाल में विभन्न विभागों के भिन्न भिन्न स्तर के पदों पर आसीन रहकर आपने उत्तरदायित्वपूर्ण एवम कुशलता से कार्यो का निष्पादन किया है जिसमें MMGSY का कार्यकाल सदैव स्वर्णिम काल के रुप में याद किया जाएगा । अधिकारियों एवम कर्मचारियों के मध्य आप एक कड़क पदाधिकारी एवम विभाग की समस्याओं के त्वरित निवारण में अग्रणी भूमिका अदा की है । आप आस-पास रहकर तो सदैव मार्ग दर्शन करते रहे हीं हैं , आशा एवम पूर्ण आस्था है कि आप दूर रहकर भी हमारे रहेगें ।

विदाई की इस कठिन वेला में हम आपके क्रियमान शक्तियों का गुणानुवाद करने में असमर्थ हो रहे हैं । अतः यदि किसी मोड़ पर हम पदाधिकारी- कर्मचारी से किसी प्रकार की भूल हुई हो जिससे आप आहत हुए हों तो इसके लिए हम सभी क्षमा प्रार्थी हैं ।

पदाधिकारीगण एवम कर्मचारीगण की हार्दिक कामना है कि आप जहाँ भी, जिस क्षेत्र या परिवेश में पदार्पण करे -वह फलदायी हो- मंगलकारी हो ।

हम हैं:-

आपके स्नेहाभिशिक्त पदाधिकारी एवम कर्मचारीगण ग्रामीण कार्य बिभाग, बिहार पटना ।