Tuesday, July 28, 2026

कॉकरोच आंदोलन और भारत

लोकतंत्र लोकलज्जा से या लोकविश्वास ही उसका आधार है । यदि लोकतंत्र में कभी भी लोकशाही में या मत से दिखने लगे कि जनमत साथ नहीं है या जन का विरोध है या जनविश्वास खो चुके हैं तो निसन्देह इस्तीफ़ा देना लोकतंत्र की गरिमा या लोकतंत्र का तक़ाज़ा है ।

इस बार के आंदोलन में कई बातें सीखने की है । नौजवान आज मीडिया न्यूज़ या प्रिंट न्यूज़ देखता नहीं है या यूँ कहें कि वह स्वयं न्यूज़ कंटेंट्स बनाता है । सबकी अपनी अपनी सोंच है पर राष्ट्र सर्वोपरि है और सभी ने अहिंसक आंदोलन चलाकर लोगों को दिखा दिया । उसमें भी सबसे बड़ी बात है कि सभी डिजिटल क्रिएटर हैं और उनकी अभिव्यक्ति हमलोगों से अधिक है । बहुत बड़ी बड़ी बात एक छोटे से शब्द या हावभाव से प्रदर्शित करना उनका बाँयें हाथ का खेल है । इनलोगों को स्पष्ट दिखता है कि देश में बुजुर्ग कुछ नहीं कर सकते । उन्हें आंदोलन करने में दिलचस्पी नहीं है बल्कि समस्याओं से जूझना उनकी नियति है ।


एक बात और है देश में पहली बार यह GEN G अपने आंदोलन में अपने करोड़ रुपया से अधिक कमानेवाले माँ पिता को भी आंदोलन में शिरकत करने के लिए मजबूर कर दिया । सबसे विचित्र महिलाओं नहीं बच्चियों की भागीदारी से हतप्रभ हूँ । लड़कियाँ अपनी सुरक्षा के लिए सहमी नहीं बल्कि आत्मनिर्भर होकर कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन में २४ घंटे योगदान दिया । आंदोलन में लड़के हों या लड़की कभी भी अपने घर में अपने माता पिता से डाँट तक नहीं सुनी मार खाने की बात तो सोंच भी नहीं सकते हैं । यही नहीं इन बच्चों को स्कूल में भी टीचर से कभी पिटायी नहीं हुई थी पर फिर भी पुलिस द्वारा लाठी , कैनन वाटर, घसीटने, आंसू गैस छोड़ने या पैलट गन के बाद भी अपना आपा नहीं खोया और नाहीं धैर्य में कमी आई । लोकतांत्रिक तरीके से अपना अहिंसक आंदोलन जारी रखा जबकि कुछ असामाजिक तत्व या सरकारी पुलिस द्वारा हिंसक प्रदर्शन किए जाने पर भी चट्टान की तरह अडिग रहा । सारे भांट मीडिया को नहीं बल्कि उनके मालिक को आनेवाले समय दुराग्रह से समाचार परोसने पर आनेवाली जेनरेशन न्यूज़ सिस्टम को ही धत्ता बना देगा यह सोंचा नहीं था पर मजबूर होकर मोदी जी भी दो बार अपनी अपील न्यूज़ में नहीं दी बल्कि इंस्टाग्राम पर जाकर दिया । मेरे बच्चे जेंन जी नहीं हैं पर प्रतिदिन फ़ोन पर कह रहे थे इंस्टाग्राम देखे पापा! एक छोटा सा कॉकरोच 🪳 जिससे महिलायें क्या पुरुष भी घृणा करता है आज आजाद भारत में बिना किसी नेता के सबसे कम दिनों में विरोध कर सबसे बड़ी जीत दर्ज कर ली । इस आंदोलन सबसे बड़ी ख़ासियत मजहब,धर्म, सम्प्रदाय, जातपात, उत्तर दक्षिण, पूरब पश्चिम सबको अपने में समेटे था और कोई विसंगति नहीं दिखी । इससे भी बड़ी बात यह थी कि विभिन्न राजनीतिक विचारधारा के छात्र अपने अपने ढंग से विरोध प्रदर्शित करते दिखे पर अपनी अहमियत की चादर दूर फेंक दिए !


शाबाश जेन जी! आनेवाला कल तुम्हारा ही है । यह तुम समझते ही नहीं हो पर लोकतंत्र और सत्य अहिंसा में विश्वास करते हो , यह देखकर विशाल भारत अपने पर नाज कर रहा होगा । भारत की अखंडता , संविधान, भाईचारा, लोकतंत्र को अक्षुण्ण होते देखकर मेरा दिल आहलाद्वित हो रहा है । 


जय युवा ! जय भारत ! जय संविधान! जय लोकतंत्र !