वर्षभर के 27 कृषि नक्षत्र और उनकी तिथियाँ
1. अश्विनी 14 अप्रैल - 27 अप्रैल
कृषि नववर्ष, खेतों की पहली जुताई।
2. भरणी 27 अप्रैल - 11 मई
तीव्र गर्मी की शुरुआत, जमीन तपना।
3. कृत्तिका 11 मई - 25 मई
नौतपा का प्रारंभ, धान के खेतों की तैयारी।
4. रोहिणी 25 मई - 08 जून
मानसून पूर्व की हवाएं, आंधियां।
5. मृगशिरा 08 जून - 22 जून
प्री-मानसून बौछारें, खरीफ की बुवाई।
6. आर्द्रा 22 जून - 06 जुलाई
मानसून का मुख्य आगमन, भारी वर्षा।
7. पुनर्वसु 06 जुलाई - 20 जुलाई
फसलों के लिए अमृत वर्षा, धान रोपाई।
8. पुष्य 20 जुलाई - 03 अगस्त
लगातार रिमझिम वर्षा, खरपतवार नियंत्रण।
9. अश्लेषा 03 अगस्त - 17 अगस्त
अत्यधिक वर्षा, कीटों का प्रकोप संभव।
10. मघा 17 अगस्त - 31 अगस्त
मघा के बरसने से फसलों में भरपूर दाने बनते हैं।
11. पूर्वा फाल्गुनी 31 अगस्त - 13 सितंबर
उमस और मध्यम वर्षा, फसलों का पकना शुरू।
12. उत्तरा फाल्गुनी 13 सितंबर - 27 सितंबर
मानसून की विदाई का समय, बाजरा-मक्का कटाई।
.13 हस्त (हथिया) 27 सितंबर - 11 अक्टूबर
रबी फसलों (गेहूं, चना) की नमी के लिए अंतिम वर्षा।
.14 चित्रा 11 अक्टूबर - 24 अक्टूबर
मौसम साफ होना, रबी फसलों के खेतों की जुताई।
15. स्वाति 24 अक्टूबर - 06 नवंबर
ओस पड़ना शुरू, सरसों और चने की बुवाई।
16. विशाखा 06 नवंबर - 19 नवंबर
हल्की ठंड का आगमन, गेहूं की बुवाई का उत्तम समय।
.17 अनुराधा 19 नवंबर - 03 दिसंबर
रबी फसलों में पहली सिंचाई।
.18 ज्येष्ठा 03 दिसंबर - 16 दिसंबर
कड़ाके की ठंड की शुरुआत, पाला पड़ने का खतरा।
.19 मूल 16 दिसंबर - 29 दिसंबर
सूखी और ठंडी हवाएं, आलू-सब्जियों की देखरेख।
.20 पूर्वाषाढ़ा 29 दिसंबर - 11 जनवरी
कोहरा और शीत लहर, पाले से बचाव।
.21 उत्तराषाढ़ा 11 जनवरी - 24 जनवरी
फसलों में कल्ले फूटना, यूरिया का छिड़काव।
.22 श्रवण 24 जनवरी - 06 फरवरी
दलहन फसलों में फूल आना।
.23 धनिष्ठा 06 फरवरी - 19 फरवरी
बसंत ऋतु का आगमन, सरसों में फलियां बनना।
.24 शतभिषा 19 फरवरी - 04 मार्च
गन्ने और गर्मियों की सब्जियों की बुवाई।
.25 पूर्वा भाद्रपदा 04 मार्च - 17 मार्च
तापमान बढ़ना, गेहूं की बालियां पकना।
.26 उत्तरा भाद्रपदा 17 मार्च - 31 मार्च
गेहूं, सरसों और चने की कटाई (Harvesting)।
.27 रेवती 31 मार्च - 14 अप्रैल
अनाज का भंडारण (Storage)
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